देश में स्वदेशी तकनीक से डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने आकाश प्रतिरक्षा मिसाइल प्रणाली का विकास तो कर दिया है लेकिन जिस तरह से परियोजना चल रही है, उससे इसके फुस्स हो जाने का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में आकाश का सतह से हवा में मार करने वाला संस्करण आकाश-2 परीक्षण में सफल नहीं हो पाया था।
इतना ही नहीं भारत के मुख्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षण ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में आकाश मिसाइल प्रणाली की असफलता दर 30 प्रतिशत बताई है। वैज्ञानिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आकाश मिसाइल परियोजना प्रणाली में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। परियोजना के प्रमुख चंद्रमौलि और अन्य वैज्ञानिकों के बीच में तालमेल में काफी कमी है। बताते हैं निर्णय लेने में देरी, ठेकेदारों के साथ गुणवत्ता को बनाए रखने के प्रयास तथा वैज्ञानिकों के बीच संवादहीनता के कारण आकाश मिसाइल प्रणाली का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
तालमेल की इसी कमी के चलते फरवरी 2014 से जून 2015 तक आकाश मिसाइल प्रणाली का उत्पादन भी ठप था। स्थिति यह है कि डिजाइन अथवा अन्य क्षेत्र में छोटी सी समस्या के लिए जो रिपोर्ट 10-15 दिन में आनी चाहिए, उसे तैयार करने में छह-आठ महीने तक लग रहे हैं। अथारिटी पोल्डिंग शील्ड पर्टीकुलर्स को लेकर भी यही स्थिति है।
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मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस को पिछले चार साल से इसे सौंपने में टाल मटोल चल रही है। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार इसके चलते आकाश से जुड़े छोटे-छोटे मुद्दों के समाधान में जहां काफी समय लग जा रहा है, वहीं मिसाइल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। यही वजह रही कि हाल में मिसाइल परीक्षण के दौरान प्रोपल्सन सिस्टम में खराबी के चलते प्रणाली खरी नहीं उतरी।
क्या आकाश
आकाश देश की मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली है। यह जमीन से हवा में मार करने में सक्षम है। इस मिसाइल प्रणाली की विशेषता यह है कि इसे मोबाइल लांचर से कहीं से भी तैनात और लांच किया जा सकता है। यह स्वत: रडार से दुश्मन के वार (मिसाइल, लड़ाकू विमान, हेलीकाप्टर आदि) को 18-30 किमी दूर ही पहचान लेगी और पलक झपकते ही उसे हवा में ही ध्वस्त कर देगी।
इस मिसाइल प्रणाली को डीआरडीओ ने विकसित किया है और इसे सेना, वायुसेना, नौसेना में प्रतिरक्षी प्रणाली के तौर पर तैनात किया जाना है। इसके अलावा दुश्मन के हमलों से बचने के लिए इसे दिल्ली एनसीआर क्षेत्र, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान, चीन और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात करने की प्रक्रिया चल रही है।