मानसून सत्र में आए तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस के बाद अब एनडीए के सहयोगी दलों ने भी मोर्चा खोल दिया है। विधेयकों के खिलाफ किसान नेताओं ने दिल्ली कूच और संसद पर प्रदर्शन का एलान किया था, लेकिन किसान नेता गुरनाम सिंह को उनके समर्थकों के साथ दिल्ली हरियाणा सीमा पर ही रोक लिया गया।
वहीं, एनडीए के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने भी विधेयकों को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को चिट्ठी लिखी है।
अकाली दल नेता और पंजाब के पूर्व सीएम सुखबीर सिंह बादल ने कहा, सरकार ने सहयोगियों से पूछे बिना ही विधेयक लेकर आई है। विधेयक पास कराने को लेकर सरकार को इतनी जल्दी क्यों है। किसानों को आशंका है कि विधेयक के जरिये सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य बंद करने जा रही है।
बादल ने कहा कि जब तक किसानों की आशंकाएं दूर नहीं होती, तब तक विधेयकों को स्थायी समिति के पास भेज दिया जाना चाहिए।
कृषि को कॉर्पोरेट कल्चर की ओर ले जाने का प्रयास
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा है कि यह विधेयक के जरिये सरकार कृषि को कॉर्पोरेट कल्चर की ओर लेकर जा रही है। अगर किसानों का मांगों पर सुनवाई नहीं की तो पूरे देश के किसान एकजुट होकर आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा हम केवल इतना कह रहे हैं कि आप विधेयक में एमएसपी से कम पर खरीद नहीं होगी ऐसा प्रावधान किया जाए।