एके एंटनी ने सुधाकरन को दी नसीहत
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AK Antony On K Sudhakaran: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर घमासान की खबर सामने आई है। हालांकि, अब पार्टी के 'भीष्म पितामह' कहे जाने वाले ए.के. एंटनी ने कमान संभाल ली है। गुरुवार को एंटनी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेता और कन्नूर के सांसद के. सुधाकरन से बात की है और उन्हें हाईकमान का फैसला हर हाल में मानने की सलाह दी है।
असंतोष की आग में तप रहे सुधाकरन!
दरअसल, 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कन्नूर विधानसभा सीट से के. सुधाकरन अपनी दावेदारी ठोक रहे थे। लेकिन पार्टी के 'एक व्यक्ति, एक पद' वाले संभावित फैसले से सुधाकरन खासे नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी को भांपते हुए एंटनी ने उन्हें याद दिलाया कि यह समय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का नहीं, बल्कि वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) को सत्ता की हैट्रिक बनाने से रोकने का है।
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'अपनी जान दांव पर लगाकर मार्क्सवादियों से लड़े सुधाकरन'
ए.के. एंटनी ने कहा, "सुधाकरन ने हमेशा मार्क्सवादियों के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ाई लड़ी है। मैंने उनसे कहा है कि इस वक्त उन्हें चाहे कितनी भी कठिनाई महसूस हो, लेकिन उन्हें पार्टी के फैसले को सिर आंखों पर लेना चाहिए। हमारा एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि एलडीएफ को तीसरा कार्यकाल न मिले।"
कांग्रेस के लिए साख का सवाल है कन्नूर
बता दें कि कन्नूर सीट सीपीआईएम का गढ़ माना जाता है। सुधाकरन वहां कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं। अगर वे कांग्रेस से ऐसे ही नाराज रहे तो उनकी नाराजगी कन्नूर और उसके आसपास की कई सीटों पर खेल बिगाड़ सकती है। कांग्रेस आलाकमान के लिए चुनौती यह है कि अगर वे सुधाकरन को छूट देते हैं, तो अन्य सांसद भी विधानसभा टिकट के लिए कतार में लग जाएंगे। अब गेंद सुधाकरन के पाले में है। क्या वह अपने 'बड़े भाई' एंटनी की बात मानकर पीछे हटेंगे या फिर कन्नूर के अखाड़े में अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकेंगे?