राष्ट्रीय जांच एजेंसी और बिहार पुलिस की जांच में सामने आया है कि किस तरह 125 एके-47 रायफलें नक्सलियों तक पहुंची। जांच के मुताबिक भारतीय सेना द्वारा खराब हो चुकी रायफलें, जिन्हें मध्यप्रदेश के जबलपुर के स्टोर में रखा गया था, उन्हें अलग-अलग भागों में बिहार के मुंगेरपुर पहुंचीं जहां फाउंड्रीज में इनसे हथियार तैयार किए गए।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंगेर से ये हथियार माओवादी और गैंग्स्टरों तक पहुंचे। जांच में मिली इस जानकारी से सवाल उठता है कि सेना खराब हो चुके हथियारों को किस तरह रखती है और इन हथियारों तक कौन पहुंच सकता है।
बता दें कि रैकेट का संदिग्ध मास्टरमाइंड पूर्व शस्त्रसाज (आर्मरर) पुरुषोत्तम रजक को सितंबर में जबलपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उसने बताया था कि अगस्त में सेना के अधिकारियों ने आर्मी फैसिलिटी से एके-47 रायफल के पार्ट चुराने के शक में पकड़ा था। रजक के यह कहने पर कि उसकी गाड़ी में पाए गए रायफल के पार्ट किसी और ने रखे थे, उसे छोड़ दिया गया था।
बिहार पुलिस ने यह खुलासा अगस्त में किया था लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते इसे एनआईए के सुपुर्द कर दिया गया था। मुंगेर हथियारों के व्यापार के केंद्र के रूप में उभरा है। यहां अन्य हथियारों के साथ एके-47 रायफलों का भी व्यापार होता है जिसके पार्ट्स को सैन्य डिपो से चुराकर वहीं रायफल तैयार की जाती हैं। मुंगेर पुलस पहले ही एक ऐसे रैकेट को पकड़ चुकी है, जिसमें जबलपुर के केंद्रीय ऑर्डनेंस डिपो के अधिकारियों और स्थानीय हथियार डीलर्स के बीच संबंध मिले थे।