सभी दलों के साथ गठजोड़ का दरवाजा खटखटाकर लौटे चौधरी अजीत सिंह को अब राष्ट्रीय लोकदल और जनतादल परिवार रास आने लगा है। बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यू) के अध्यक्ष नीतिश कुमार ने भी चौधरी की इस पहल का स्वागत किया है। इस गठजोड़ में झारखंड के पूर्व मूख्यमंत्री और झाविमो अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी भी शामिल हो रहे हैं तथा चार अक्तूबर को बड़ौत में राजनीतिक ताल ठोकने की तैयारी है। चौधरी का दावा है कि इस दौरान बड़ौत में तिल रखने की जगह नहीं मिलेगी।
चौधरी अजीत सिंह की इस पहल को पश्चिमी उ.प्र. की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके जरिए जद(यू), झाविमो उ.प्र. विधानसभा चुनाव 2017 में अपनी मौजूदगी का भी एहसास कराएगा। वहीं चौधरी अजीत सिंह ने बेटे जयंत चौधरी को विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा बनाने का मन बनाया है। किसान मजदूर महारैली में वह बाकायदा इसकी घोषणा कर सकते हैं। फिलहाल रैली को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय लोकदल ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।
चौधरी को पता है कि रैली की सफलता से उ.प्र. की राजनीति में बड़ा संदेश जाएगा। इसी को केन्द्र में रखकर उन्होंने पहले चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा का अनावरण और फिर बड़े चौधरी रास्ते पर चलकर किसान मजदूर महारैली का आयोजन किया है। इसमें जद(यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और प्रवक्ता केसी त्यागी भी भाग लेंगे।