राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर शरद पवार और भतीजे अजित पवार में रस्साकशी चल रही है। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के लिए नोटिस का जवाब देने की मोहलत बढ़ा दी है। इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार महाराष्ट्र सरकार में मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और हसन मुश्रीफ के साथ पूर्व मंत्री नवाब मलिक से मिलने पहुंचे और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। राकांपा के दो अलग-अलग गुटों के छगन भुजबल और अनिल देशमुख ने भी नवाब मलिक से मुलाकात की।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विरोधी गुटों को पार्टी के नाम और निशान से संबंधित नोटिस का जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया। दोनों शरद पवार गुट और अजित पवार खेमे ने पार्टी के नाम और निशान के दावे पर चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी थी।
27 जुलाई को मामले में नोटिस जारी किया था
इससे पहले चुनाव आयोग ने 27 जुलाई को मामले में नोटिस जारी किया था। आयोग ने दोनों खेमों से असली पार्टी होने के दावे से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। चुनाव आयोग ने दोनों खेमों को तय समय में दस्तावेजों का आदान-प्रदान करने को कहा था।
अजित की बगावत के बाद बदले हालात
दरअसल, पांच जुलाई को निर्वाचन आयोग को 40 सांसदों, विधायकों और एमएलसी के हलफनामों के साथ-साथ कुछ एनसीपी सदस्यों का एक प्रस्ताव भी मिला था, जिसमें उन्होंने अजित पवार को एनसीपी प्रमुख के रूप में चुना था। इस संबंध में पत्र 30 जून को लिखा गया था। इससे दो दिन पहले अजित पवार ने राकांपा को दो फाड़ कर दिया था और आठ मंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण की थी। अजित ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
शरद पवार ने कही यह बात
इससे पहले NCP प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मेरी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग ने मुझे नोटिस दिया। मैं ECI के कारण चिंतित नहीं हूं, लेकिन यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार के कुछ शक्तिशाली लोगों ने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर ECI के फैसले में हस्तक्षेप किया। हम आज ECI के उस निर्णय का परिणाम देख रहे हैं। मुझे संदेह है कि हमारे साथ भी ऐसा ही कुछ किया जा सकता है।