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Maharashtra Politics: 'अजित पवार की एनसीपी का शरद पवार से विलय हो', संजय राउत ने महायुति छोड़ने की दी सलाह

Sat, 03 Jan 2026 03:43 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने अजित पवार की एनसीपी को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) में विलय करने की सलाह दी है। राउत के मुताबिक, पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव में साथ आना इस विलय का संकेत है।
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संजय राउत, शिवसेना यूबीटी सांसद - फोटो : PTI
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विस्तार
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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) में विलय करने की सलाह दी है। राउत का कहना है कि जब पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निकाय चुनाव में दोनों गुट साथ आ गए हैं, तो फिर अलग-अलग राजनीतिक राह पर चलने का कोई औचित्य नहीं बचता। 

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राउत ने सवाल उठाया कि अगर अजित पवार भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, तो फिर वह महायुति सरकार में क्यों बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार को भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार छोड़कर शरद पवार के पास लौट आना चाहिए। राउत के मुताबिक, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अजित पवार की राजनीतिक दिशा बदल रही है।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासी टकराव
संजय राउत ने कहा कि अजित पवार और भाजपा एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में दोनों का एक ही सरकार में होना जनता को भ्रमित करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब आरोप इतने गंभीर हैं, तो सत्ता में साथ बने रहना समझ से परे है।
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पुणे-पिंपरी चुनाव में साथ
राउत ने इस बात पर जोर दिया कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव में एनसीपी और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का साथ आना राजनीतिक संकेत है। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन दिखाता है कि दोनों धड़े एक साथ आ सकते हैं, फिर स्थायी समाधान क्यों नहीं।

पीसीएमसी को लेकर आरोप
अजित पवार ने हाल ही में पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि बीते नौ वर्षों में निगम को कर्ज में धकेल दिया गया। इस बयान को लेकर भी राउत ने सवाल उठाया कि जब भाजपा इस निगम को चला रही थी, तब ये हालात कैसे बने।

टिकट और आपराधिक पृष्ठभूमि का मुद्दा
नगर निकाय चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने पर भी विवाद हुआ। अजित पवार ने इसे यह कहते हुए सही ठहराया कि जब तक दोष साबित न हो, कोई अपराधी नहीं होता। उन्होंने अपने ऊपर लगे सिंचाई घोटाले के आरोपों का भी हवाला दिया।
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