सार
अजीत पवार ने कहा कि मुझे व्यक्तिगत रूप से ईवीएम पर पूरा भरोसा है। अगर ईवीएम खराब है तो छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विपक्षी सरकारें कैसे हैं। ईवीएम में हेरफेर करना संभव ही नहीं।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बाद अब एनसीपी नेता अजीत पवार ने भी कांग्रेस के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। अजीत ने शनिवार को ईवीएम से चुनाव कराने का समर्थन किया है। पवार ने कहा कि मुझे ईवीएम पर पूरा भरोसा है। इसमें हेरफेर करना संभव नहीं है। लोग चुनाव हार जाते हैं तो ईवीएम को दोष देने लगते हैं। उन्हें जनता का जनादेश स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मशीनें खराब होतीं तो पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सहित देश के अन्य राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें नहीं होतीं।
पवार ने कहा कि मुझे व्यक्तिगत रूप से ईवीएम पर पूरा भरोसा है। अगर ईवीएम खराब है तो छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विपक्षी सरकारें कैसे हैं। ईवीएम में हेरफेर करना संभव ही नहीं। अगर यह साबित हो जाता है कि ईवीएम से छेड़छाड़ हुई है, तो अराजकता फैल जाएगी। ऐसा करने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता।
पीएम की लोकप्रियता पर भी बोले पवार
पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। प्रशंसा करते हुए पवार ने कहा कि उनके नेतृत्व में भाजपा 2019 में सत्ता में लौटी। विभिन्न टिप्पणियों के बावजूद वह लोकप्रिय रहे। मोदी के नाम पर भाजपा 2014 में सत्ता में आई और उन्हीं के नाम की ताकत से दूर-दराज के इलाकों में पार्टी पहुंच पाई। उनके खिलाफ कई बयान दिए गए, लेकिन वह लोकप्रिय होते गए। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने कई राज्यों में जीत दर्ज की। 2019 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा 300 के आकड़े को पार कर गई। पवार ने पीएम के शिक्षा पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिक्षा सवाल नहीं है। इसका ज्यादा महत्व नहीं है।
पहले शरद पवार ने किया था समर्थन
शुक्रवार को एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अदाणी का समर्थन किया था। हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर पवार ने कहा था कि ऐसा लगता है कि अदाणी समूह पर विदेशी फर्म हिंडनबर्ग को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया। बिना यह सोचे-समझे कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। मुझे ऐसा लगता है कि हिंडनबर्ग ने देश के एक औद्योगिक संस्थान को निशाना बनाया है। किसी ने इस फर्म का इस विवाद से पहले नाम नहीं सुना। मामले के कई पक्ष हैं। सभी पक्षों पर ध्यान देने की जरूरत है। विदेशी फर्म के अदाणी समूह पर आरोप के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अपनी निगरानी में जांच कमेटी बनाई। इसमें सेवानिवृत्त जज भी हैं। शीर्ष अदालत ने समयबद्ध रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इसके बाद जेपीसी गठन की मांग की आवश्यकता नहीं है।