राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की ताकत सिर्फ उसकी सेना या तकनीक से नहीं, बल्कि उसके लोगों की इच्छाशक्ति से तय होती है। डोभाल ने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसमें कई कारक मिलकर देश को मजबूत बनाते हैं।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में डोभाल ने कहा कि अक्सर देश की ताकत का आकलन करते समय लोगों की इच्छाशक्ति को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो सबसे बड़ी गलती होती है। उन्होंने कहा कि सेना, तकनीक, संसाधन और कूटनीति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जनता की ताकत निर्णायक होती है।
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क्या राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सेना की जिम्मेदारी है?
डोभाल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर नागरिक की जागरूकता और भागीदारी से ही देश की सुरक्षा मजबूत होती है।
क्या वैश्विक उदाहरणों से समझाया मुद्दा?
उन्होंने दुनिया के उदाहरण देते हुए कहा कि सोवियत संघ को अफगानिस्तान से और अमेरिका को वियतनाम व अफगानिस्तान से पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक या सेना की कमी नहीं थी, बल्कि वहां के लोगों की इच्छाशक्ति निर्णायक साबित हुई।
क्या युवाओं को दिया खास संदेश?
डोभाल ने युवाओं से कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में आने के लिए मानसिक शक्ति, अनुशासन और टीमवर्क जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र है जहां जीत ही सब कुछ है, हार का कोई विकल्प नहीं होता।
क्या पेशेवरों की भूमिका भी अहम बताई?
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रिसर्च और ऑपरेशन से जुड़े लोगों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी जानकारी और तकनीकी कौशल से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है और बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं। इस कार्यक्रम में अजीत डोभाल को उनके योगदान के लिए मानद पीएचडी की उपाधि भी दी गई। उन्होंने इस सम्मान को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हुए आभार जताया और इसे देश की सेवा का परिणाम बताया।
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