बंगाल के लिए विशेष चुनाव पर्यवेक्षक अजय नायक ने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की तुलना 15 पहले के बिहार से की और कहा कि लोगों ने राज्य की पुलिस में विश्वास खो दिया है। यह तीखी आलोचना ऐसे समय पर आई है जब चुनाव आयोग ने माल्दा के पुलीस अधीक्षक (एसपी) अर्नब घोष को हटा दिया है। वह छठवें ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें चुनावी ड्यूटी से हटाया गया है।
नायक ने कहा, 'बंगाल की वर्तमान परिस्थिति 10-15 साल पहले बिहार की तरह है। बिहार के लोग और पार्टियां समझ चुकी थीं कि यह परिस्थिति जारी नहीं रह सकती। इसलिए वहां बदलाव आया।' नायक बिहार से 1984 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्य के पूर्व चुनाव अधिकारी रह चुके हैं। उन्हें बंगाल में अंतिम पांच चरणों के चुनावों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल को होने वाले तीसरे चरण के चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की 324 कंपनियों की तैनाती 92 प्रतिशत से ज्यादा बूथों पर की गई है। तीसरे चरण में पांच लोकसभा सीटें- बालूरघाट, उत्तरी माल्दा, दक्षिणी माल्दा, जंगीपुर और मुर्शिदाबाद शामिल हैं। तृणमूल नेता सुब्रत बख्शी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
बख्शी ने इस बात पर हैरानी जताई है कि कैसे एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया गया है। तीसरे चरण के मतदान के लिए तैनात किए गए सुरक्षा बलों पर संतोष जाहिर करते हुए नायक ने कहा, 'पश्चिम बंगाल सही दिशा में जा रहा है। चुनाव प्रबंधन अच्छा है और यहां पर्याप्त सुरक्षाबल हैं। हम 100 प्रतिशत केंद्रीय बल कवरेज की कोशिश कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि यहां राजनीतिक पार्टियों और लोगों को कोई परेशानी होगी।'
तीसरे चरण के मतदान से 72 घंटे पहले हुए फेरबदल में बरुईपुर के एसपी अजय प्रसाद को रविवार से माल्दा एसपी का पदभार लेने के लिए कहा गया। भाजपा ने घोष को लेकर आपत्ति जताई थी क्योंकि उन्हें एक पद पर तीन साल पूरे होने में केवल दो महीने बचे थे। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार कोई भी अधिकारी एक पोस्ट पर तीन साल से ज्यादा समय तक नहीं रह सकता। इससे पहले महीने की शुरुआत में आयोग ने कूच बिहार के एसपी को पहले चरण के मतदान के बमुश्किल 36 घंटे पहले हटा दिया था।