नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने एयरलाइनों से हवाई किराए के रुझानों का अध्ययन करने के लिए डेटा की मांग की थी। इसपर एयरलाइनों के द्वारा मना करने पर मामले में गर्माहट आ गई है। साथ ही डीजीसीए ने कहा है कि वह डेटा साझा करने से इनकार करने के बाद इस मामले की जांच कर रहा है।
एयरलाइनों के द्वारा हवाई किराए का डाटा साझा करने से मना करने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) एक्शन में आता हुआ नजर आ रहा है। मामले में डीजीसीए ने कहा है कि वह एयरलाइनों द्वारा हवाई किराए का डेटा साझा करने से इनकार करने के बाद इस मामले की जांच कर रहा है। बता दें कि डीजीसीए ने एयरलाइनों से हवाई किराए के रुझानों का अध्ययन करने के लिए डेटा की मांग की थी, खासकर पीक सीजन और महाकुंभ जैसे खास अवसरों के दौरान, जब बहुत सारी शिकायतें आई थीं कि किराए बहुत ज्यादा हैं।
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डीजीसीए के अधिकारी ने दी जानकारी
साथ ही मामले में डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वे एयरलाइनों से बातचीत कर रहे हैं। साथ ही टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीTCS) को इस मामले की जांच करने का काम सौंपा गया है। दिसंबर में DGCA ने एयरलाइनों से हवाई किराए का डेटा मांगा था, जिसमें बुकिंग तिथि, किराए का विवरण और यात्रियों की संख्या शामिल थे। जनवरी और मार्च में DGCA और एयरलाइनों के बीच इस विषय पर बैठकें भी हुई थीं।
एफआईए ने जताई आपत्ति
हालांकि, मामले में फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने आपत्ति जताते हुए कहा कि एयरलाइनों को किराए का डेटा साझा करना उनकी गोपनीयता, संचालन और प्रतिस्पर्धा को खतरे में डाल सकता है। FIA ने डीजीसीए को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि इस डेटा को बाहरी एजेंसियों के साथ साझा करने से कई जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे कि गलत जानकारी का लीक होना और एयरलाइनों के लिए व्यावसायिक नुकसान। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के लिए उड़ानों के ऊंचे किराए के मुद्दे पर भी हस्तक्षेप किया है और इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।