एयरक्राफ्ट्स की उड़ान के दौरान इंजन के फेल होने की वजह से बड़े हादसों की संख्या पिछले 6 सालों में और बढ़ गई हैं। ये हादसे एविएशन मिनिस्ट्री के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। पिछले 6 साल के आंकड़ों के मुताबिक 15 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखने वाले एयरक्राफ्ट हादसे का ज्यादा शिकार होते हैं।
सिविल एविएशन रेगुलेटर की ओर से जारी डाटा में हादसे के कारण बताए गए हैं। इनमें टेक ऑफ के बाद इंजन में आग लग जाना और हाई प्रेशर की वजह से इंजन का बंद हो जाना।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक इस डाटा में ये भी बताया गया है कि एयरक्राफ्ट के निरीक्षण के दौरान धांधली और कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बरती गई लापरवाही भी इन हादसों के लिए जिम्मेदार हैं।
डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यात्री के बोर्डिंग से पहले विमान का निरीक्षण किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद लैंडिंग या क्रूजिंग के दौरान हादसे होने के हालात बनते हैं तो यह गंभीर है।
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पिछले कुछ सालों में ऐसे 15 केस सामने आए हैं जिनमें से सात के इंजन सीएफएम इंटरनेशनल के बनाए हुए हैं। वहीं तकनीकी खराबी के चलते सुर्खियों में आई अमेरिकन कंपनी प्रैट एन्ड विटनी भी इस तरह के इंजन बना रही है।
डीजीसीए के मुताबिक यात्रियों की सुरक्षा इसलिए दांव पर लगती हैं, क्योंकि एयरक्राफ्ट के निरीक्षण के दौरान धांधली को अंजाम दिया जाता है। हालांकि, प्राइवेट कंपनियां भी अब यात्रियों को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने लगी हैं। भारत में अच्छा व्यापार कर रही इंडिगो ने इस साल गर्मियों में 600 फ्लाइट्स को रद्द किया था, जिनमें प्रैट एंड विटनी के इंजन लगे हुए थे।