भारतीय वायुसेना का निगरानी तंत्र जल्द ही चेतावनी और कंट्रोल सिस्टम (अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) वाले एयरक्राफ्ट से लैस होगा। इस सिस्टम के जरिए
वायुसेना पाकिस्तान और चीन की सीमा पर क्रूज मिसाइल, फाइटर जेट और ड्रोन पर आसमान से निगाह रख सकेगी। यह सिस्टम सभी वातावरण और मौसम में काम करने की क्षमता से लैस है।
डीआरडीओ के चेयरमैन एस. क्रिस्टोफर ने शनिवार को कहा कि एयरो इंडिया 2017 के दौरान बेंगुलरु में एईडब्ल्यू एंड सी सिस्टम से लैस एयरक्राफ्ट वायुसेना में शामिल होगा।
24 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट का पहला एयरक्राफ्ट 14 फरवरी को वायुसेना को मिलेगा। इसके कुछ ही महीनों बाद वायुसेना को दूसरा एयरक्राफ्ट मिल जाएगा। रक्षा विशेषज्ञ इस बात को पूरे जोर से उठाते रहे हैं कि चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारत रक्षा क्षेत्र की तैयारियों में पिछड़ रहा है। भारत के पास अवॉक्स (AWACS) प्रणाली से लैस सिर्फ तीन विमान हैं।
बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम ने ब्राजील निर्मित एंब्रेयर-145 एयरक्राफ्ट पर इसे विकसित किया है। एईडब्ल्यू एंड सी सिस्टम से वायुसेना की क्षमता गुणात्मक वृद्धि होगी।
यह सिस्टम 240 डिग्री वाले रडार सिस्टम से लैस है, जबकि अवॉक्स तकनीक वाले फॉल्कन विमान 400 किमी रेंज में 360 डिग्री कवरेज देते हैं। यह सर्विलांस क्षेत्र में खतरे की पहचान के साथ एयर डिफेंस ऑपरेशन्स के लिए कमांड और कंट्रोल सेंटर के रूप में काम करेगा। हालांकि इन एयरक्राफ्ट के वायुसेना में शामिल होने की बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान की बराबरी नहीं कर पाएगा।