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#LadengeCoronaSe : ऑक्सीजन के लिए वायु, रेलवे, सड़क मार्ग, हर उपाय शुरू किया

Sun, 25 Apr 2021 06:52 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली

सार

  • मशीनें आयात की जा रही हैं, सेना व निजी क्षेत्र भी अपने अपने तरीके से इस जीवन रक्षा की मुहिम में शामिल हो रहे है।
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ऑक्सीजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जहां तरल ऑक्सीजन की उपलब्धता कम है, वहां इसे पहुंचाने के लिए सरकार ने वायु मार्ग, रेलवे और सड़क, हर उपाय करना शुरू कर दिया है। परिवहन के लिए नए वाहन जुटाए जा रहे हैं। मशीनें आयात की जा रही हैं, सेना व निजी क्षेत्र भी अपने अपने तरीके से इस जीवन रक्षा की मुहिम में शामिल हो रहे हैं।

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क्या ऑक्सीजन सच में खत्म हो रही है अस्पतालों से?
विशेषज्ञों के अनुसार असली समस्या ऑक्सीजन को समय पर मरीज के बेड तक पहुंचाना है। इसकी वजह खराब वितरण योजना को बताया जा रहा है। जहां उत्पादन हो रहा है वहां से समय रहते वितरण का नेटवर्क बेहतर नहीं किया जा सकता सका।

दूसरी ओर दिल्ली के ही कई अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता नहीं है। बढ़ते मामलों की वजह से उत्तर प्रदेश और हरियाण में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए बनी इकाइयां भी मांग को पूरी नहीं  कर पा रही हैं । ऐसे में झारखंड व पूर्वोत्तर से ऑक्सीजन की आपूर्ति करवाई जा रही है।
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भारत में ऑक्सीजन का उत्पादन क्या काफी है?
भारत में रोज 7100 टन ऑक्सीजन बनाई जा रही है। इसमें काफी ऑक्सीजन का इस्तेमाल ओद्योगिक उत्पादन में होता है। लेकिन सरकार ने इस हफ्ते 6822 टन सप्लाई देश के 20 सर्वाधिक कोविड-19 प्रभावित राज्यों में करने का आदेश दिया।  यह बताता है कि कोविड-19 के मामले किस कदर तेजी से बढ़े।

ऑक्सीजन में देरी क्यों?

  • दूरी: दिल्ली में सात अलग-अलग राज्यों से ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है जो करीब 1000 किमी दूर तक मौजूद है।
  • सीमित संसाधन: ऑक्सीजन की सप्लाई विशेष टैंकरों से ही हो सकती है जो सीमित संख्या में है।
  • स्थानीय जरूरत: जिन राज्यों से ऑक्सीजन आ रही वहां भी जरूरत है। ऐसे में क्षेत्रीय प्रशासन ने पहले अपने यहां ऑक्सीजन आपूर्ति हासिल करने को सख्ती बरतनी शुरू कर दी।
  • योजना की कमी: दिल्ली को बुधवार को 378 टन ऑक्सीजन मिलनी थी, मिली 177 टन। इसकी वजह टैंकरों को कई जगह रोकना बताया गया।

अब तक उठाए गए कदम 

  • केंद्र ने ट्रेन से ऑक्सीजन से भरे टैंकरों का परिवहन शुरू कर दिया है।
  • लिंडे इंडिया सहित बड़े स्तर पर गैस उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ करार किए जा रहे हैं।
  • एयर फोर्स की मदद ली जा रही है।
  • भारतीय सेना भी जर्मनी से 23 मोबाइल ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र का आयात करने जा रही है।
  • कई उद्योग समूह अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करने का काम कर रहे हैं।

केवल 25 लाख में 7 से 10 दिन में उत्पादन संयंत्र
केवल 25 लाख खर्च कर 50 से 100 बिस्तर वाले अस्पताल की ऑक्सीजन की जरूरत पूरी की जा सकती है। इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाना होता है, जो 7 से 10 दिन में उत्पादन शुरू कर देता है।

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