सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आ रही प्रदूषित हवा से दिल्ली प्रभावित हो रही है। इस दौरान हल्के-फुल्के क्षण में यूपी सरकार की ओर से पेश वकील रंजीत कुमार ने कहा, हमारी तरफ से हवा दिल्ली नहीं आ रही। हवा पाकिस्तान की तरफ से आ रही है। इस पर चीफ जस्टिस सीवी रमन्ना ने मजाकिया लहजे में कहा, तो आप पाकिस्तान के उद्योग बंद करवाना चाहते हैं?
बेशक सुप्रीम कोर्ट में यह बात मजाक में हुई हो लेकिन क्या सच में पाकिस्तानी उद्योग दिल्ली में प्रदूषण का एक कारण हैं। जबकि नवंबर महीने में लाहौर से भी कमोबेश ऐसी ही रिपोर्ट आई कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में हालात और भी ज्यादा खराब हैं। खासकर कराची और लाहौर की हवा कुछ ज्यादा ही जहरीली हो गई। जिस समय दिल्ली में प्रदूषण के कारण स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, कर्मचारियों से वर्क्र फॉर्म होम करने के लिए कहा गया उसी समय पड़ोसी पाकिस्तान के लाहौर के लोग भी अपने अधिकारियों से घने कोहरे को देखते हुए कुछ कार्रवाई करने का अनुरोध कर रहे थे।
दिल्ली में प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आ रही प्रदूषित हवा से दिल्ली प्रभावित हो रही है। इस दौरान हल्के-फुल्के क्षण में यूपी सरकार की ओर से पेश वकील रंजीत कुमार ने कहा, हमारी तरफ से हवा दिल्ली नहीं आ रही। हवा पाकिस्तान की तरफ से आ रही है। इस पर चीफ जस्टिस सीवी रमन्ना ने मजाकिया लहजे में कहा, तो आप पाकिस्तान के उद्योग बंद करवाना चाहते हैं?
बेशक सुप्रीम कोर्ट में यह बात मजाक में हुई हो लेकिन क्या सच में पाकिस्तानी उद्योग दिल्ली में प्रदूषण का एक कारण हैं। जबकि नवंबर महीने में लाहौर से भी कमोबेश ऐसी ही रिपोर्ट आई कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में हालात और भी ज्यादा खराब हैं। खासकर कराची और लाहौर की हवा कुछ ज्यादा ही जहरीली हो गई। जिस समय दिल्ली में प्रदूषण के कारण स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए, कर्मचारियों से वर्क्र फॉर्म होम करने के लिए कहा गया उसी समय पड़ोसी पाकिस्तान के लाहौर के लोग भी अपने अधिकारियों से घने कोहरे को देखते हुए कुछ कार्रवाई करने का अनुरोध कर रहे थे।
लाहौर में 30 नवंबर 2021 को इलाके में घने कोहरे के बीच रावी नदी पर नाव में सवार लोग
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यूएस एयर क्वालिटी इंडेक्स में लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। जबकि कराची इस इंडेक्स में चौथे नंबर पर है। इसी साल नवंबर महीने में लाहौर को स्विस वायु गुणवत्ता मॉनिटर में भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में दर्ज किया गया। दिल्ली हो या लाहौर पर्यावरण को दूषित करने के लिए औद्योगिक प्रदूषण को एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। इसके मौसमी फसल जलने से होने वाला धुआं भी सर्दियों के तापमान में जहरीले धुंध के समान मिल जाता है।
बीते कुछ सालों से दिल्ली की तरह लाहौर में भी सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगता है। बढ़ते प्रदूषण से आजिज आकर हाल के कुछ सालों में, लाहौर के लोगों ने स्वयं का एयरप्यूरिफायर बनाया और हवा को साफ नहीं करने के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कुछ मुकदमे भी दायर किए हैं। लेकिन अधिकारियों ने न केवल कार्रवाई करने में देरी की बल्कि धुंध के लिए भारत को दोष दिया।
अपने यहां के प्रदूषण के लिए भारत को दोष देता है पाकिस्तान
लाहौर में वायु प्रदूषण के लिए पाकिस्तान अक्सर भारत को दोष देता है और कहता है कि यहां पंजाब-हरियाणा में जलने वाले पराली की वजह से पाकिस्तान में प्रदूषण होता है। जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री जरताज गुल ने 17 नवंबर 2018 में संसद में दावा किया है कि पाकिस्तान का घना कोहरा भारत की ओर से नियोजित ‘अपरंपरागत युद्ध’ का एक हथियार है और यहां के प्रदूषण का कुछ हद तक भारत से ताल्लुक है।
लाहौर
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लाहौर खुद ही जिम्मेदार
2019 में डॉन डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि लाहौर की हवा खराब होने की वजह भारत में किसानों का पराली जलाना नहीं है और यह लाहौर की खराब हवा खराब करने के लिए दोषी नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है, "यह दावा कि भारत में फसल जलाने से लाहौर में कोहरा होता है, न केवल सबूत के बिना कही गई बात है, बल्कि यह संकट से निपटने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक समझ की कमी को दिखाता है। तापमान, हवा, सापेक्षिक आर्द्रता और वर्षा जैसे कारक किसी भी वातावरण में वायु गुणवत्ता के स्तर को प्रभावित करते हैं। हालांकि यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि लाहौर खुद ही शहर को प्रदूषित रखने के लिए पूरे साल पर्याप्त उत्सर्जन करता है। सरकारों का परिवहन, बिजली और उद्योग क्षेत्रों से निकले वाले उत्सर्जन पर बहुत कम नियंत्रण है।
विश्व बैंक का अध्ययन बताता है कि लाहौर और पाकिस्तान के अन्य शहरों में PM2.5 उत्सर्जन का कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन से बहुत गहरा संबंध है। इसका उत्सर्जन जीवाश्म ईंधन का परिणाम है जो वायु की गुणवत्ता को खराब करते हैं। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन इंजन का इस्तेमाल विशेष रूप से डीजल वाहनों में होता है।
लाहौर बस सेवा
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गाड़ियों की बढ़ती संख्या भी जिम्मेदार
ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स डेटा के गैलप विश्लेषण के अनुसार, 2000 और 2015 के बीच पाकिस्तान में पंजीकृत कारों की संख्या में 268 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं निजी वाहनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 2016 और 2017 के बीच, देश में 70 फीसदी अधिक पुरानी कारों का आयात किया गया। 2015 में ही पंजाब सरकार ने प्रांत में प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में लाहौर में वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप हवा की गुणवत्ता और खराब हुई है।
कोयला आधारित उद्योग भी प्रदूषण का कारण
इसी तरह ताप विद्युत संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए प्रयुक्त फर्नेस तेल में सल्फर की मात्रा तीन प्रतिशत तक हो जाती है, वह भी प्रदूषण का एक कारण है। लाहौर के पास कम से कम आठ थर्मल पावर प्लांट हैं जो अधिक स्वच्छ प्राकृतिक गैस के बजाय फर्नेस ऑयल का उपयोग करते हैं।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ और पाकिस्तान के मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक कमर उज जमान चौधरी ने 2015 में अपने एक बयान में कहा था ‘हमारे निचले वातावरण में प्रदूषकों का मुख्य स्रोत पूर्वी पंजाब है जहां सभी कोयला आधारित उद्योग केंद्रित हैं। वहीं हमा कारखाने और कारों से होने वाले उत्सर्जन भी प्रदूषण के लिए जिम्मेवार है’।
दिल्ली में प्रदूषण
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सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं ये देश भी हैं जिम्मेदार
जून 2020 में 15 वैज्ञानिकों की एक टीम ने दिल्ली की आबोहवा को लेकर शोध किया था। इसमें आईआईटी कानपुर और दिल्ली के साथ-साथ स्विट्जरलैंड की वायुमंडलीय रसायन विज्ञान प्रयोगशाला के शोधकर्ता भी शामिल थे। शोध में वैज्ञानिकों ने तीन एयर कॉरिडोर की पहचान की है। शोध के अनुसार दिल्ली की आबोहवा खराब करने के लिए पाकिस्तान, ईरान और नेपाल के एयर कॉरिडोर जिम्मेदार हैं।
शोध के मुताबिक पहला कॉरिडोर उत्तर पश्चिम दिशा से है जो पाकिस्तान, पंजाब और हरियाणा से प्रदूषित हवा दिल्ली तक पहुंचाता है। दूसरा नॉर्थ-ईस्ट कॉरिडोर है, जो उत्तर प्रदेश से प्रदूषण लेकर राजधानी तक आता है। जबकि पूर्वी कॉरिडोर के जरिए नेपाल और उत्तर प्रदेश से प्रदूषण दिल्ली तक पहुंचता है। वैज्ञानिकों ने इस शोध को साल 2018 और 2019 की दो सर्दियों में पूरा किया था। इसके लिए आईआईटी दिल्ली कैंपस से सैंपल लिया गया था।