झंडेवालान स्थित हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट कर दूसरी जगह स्थापित करने संबंधी अदालत के सुझाव पर भी साधु संतों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वह अदालत का सम्मान करते है, लेकिन इस प्रकार हिन्दुओं के हर मामले में हस्तक्षेप करना कतई उचित नहीं है और वह इसे स्वीकार नहीं करते।
प्राचीन सिद्धपीठ श्री कालका जी मंदिर स्थित महंत निवास परिसर में मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर संवाददाता सम्मेलन में निर्वाणी अखाड़े के महंत स्वामी धर्मदास महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्रगिरी महाराज, श्री कालका जी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने झंडेवाला स्थित हनुमान मूर्ति को एयर लिफ्ट करने के मसले पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आखिर हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर ही सभी को आपत्ति क्यों होती है।
जबकि हिंदुओं के धार्मिक स्थान रास्तों में नहीं बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में स्थापित मूर्ति को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मान्यता नहीं है। इस कारण कोई भी मूर्ति दूसरी जगह शिफ्ट नहीं की जा सकती है।
उन्होंने कहा झंडेवालान स्थित हनुमान मूर्ति का अपना इतिहास व मान्यता है, ऐसे में उसे वहां से हटाना धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजधानी में कई सड़कों पर अन्य धर्मों के धर्मस्थान बने हुए हैं। कई तो बीच सड़क पर ही है। क्या वह अतिक्रमण नहीं है। अदालत को क्यों हमेशा हिन्दुओं के ही धर्म स्थलों पर अतिक्रमण नजर आता है।
हमारा कहना है कि यदि हटाना ही है तो सभी को हटाया जाए। झंडेवाला स्थित हनुमान मूर्ति वाले मंदिर में कटरा स्थित वैष्णों माता की गुफा की भांति गुफा है और उसी तरह गुफा में वैष्णों माता, काली माता और सरस्वती माता की पिंडी है।
इतना ही नहीं, गुफा में जगह-जगह पानी निकलता है और श्रद्धालुओं को तीनों माताओं की पिंडी के दर्शन करने के लिए पानी से गुजरना पड़ता है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आतें हैं।