टाटा समूह की कंपनी एअर इंडिया ने एयरबस और बोइंग कंपनियों को कुल 840 विमान खरीद का ऑर्डर दिया है। इनमें से 370 विमान अगले 10 साल में लेने का वैकल्पिक खरीद अधिकार अपने पास रखा है। ये पक्के ऑर्डर पर लिए जा रहे 470 विमानों के अलावा होंगे। इससे भारत दुनिया के हर प्रमुख देश से सीधे जुड़ सकेगा।
एचएएल अर्जेंटीना के वायुसेना के हेलिकॉप्टरों के लिए कलपुर्जे देगा
उड्डयन क्षेत्र की सरकारी निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) ने अर्जेंटीना की वायुसेना के दो टन श्रेणी वाले हेलिकॉप्टरों के पुर्जे की आपूर्ति का ठेका हासिल कर लिया है। कंपनी को इन हेलिकॉप्टरों की मरम्मत का ठेका भी मिला है। अर्जेंटीना पहले ही भारत के हल्के लड़ाकू विमान तेजस की खरीद में रुचि दिखा चुका है। एचएएल के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा, एयरो इंडिया 2023 के मौके पर इससे संबंधित अनुबंध पर अर्जेंटीना की वायुसेना (एएएफ) के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल जेवियर इसाक और एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सीबी अनंतकृष्णन ने हस्ताक्षर किए। ब्रिगेडियर जनरल इसाक ने कहा, मरम्मत और पुर्जों की आपूर्ति का अनुबंध भारत और अर्जेंटीना के बीच भविष्य की संभावनाओं और रक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनंतकृष्णन ने कहा कि यह अनुबंध लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में रक्षा निर्यात के लिए नई गति देने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
आकासा एयर भी विमानों का बड़ा ऑर्डर देने की तैयारी में
एयर इंडिया द्वारा 840 विमानों के ऑर्डर की खबर के बीच भारत की एक और एयरलाइंस कंपनी आकासा एयर ने बयान दिया है कि वह भी साल 2023 में विमानों की खरीद का बड़ा ऑर्डर देने जा रही है। यह विमान नैरो-बॉडी जेट होंगे। केवल 200 दिन पहले शुरू हुई एयरलाइंस के पास अभी 17 बोइंग 737 मैक्स विमान हैं, जो उन 72 विमानों में शामिल हैं, जिनका ऑर्डर मार्च 2027 तक पूरा होना है।
एअर इंडिया और बोइंग के सौदे से गहरे होंगे भारत संग रिश्ते : अमेरिका
अमेरिका ने कहा है कि एअर इंडिया और बोइंग के बीच भारी-भरकम विमान सौदा पहले से ही मजबूत भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा करने का मौका है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, साझा हितों, साझा मूल्यों और गहरे आर्थिक संबंधों पर आधारित हमारे पहले से मजबूत रिश्ते को और गहरा करने का यह अवसर है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस समझौते के कारण अमेरिका में 10 लाख नौकरियां सृजित होने की घोषणा की है। प्राइस ने कहा, यह सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था और यहां के कामगारों ही नहीं बल्कि भारतीय लोगों के लिए भी एक अवसर है। उन्होंने कहा, अमेरिका सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में वाणिज्यिक कूटनीति में संलग्न है और इसके जरिये हम पूरी दुनिया के देशों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए दृढ़, ठोस और व्यावहारिक तरीके तलाशते हैं।