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Ram Setu : राष्ट्रीय विरासत घोषित करने पर होगी सुप्रीम सुनवाई, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दाखिल की है PIL

Fri, 17 Feb 2023 05:51 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सीजेआई ने कहा कि हम संविधान पीठ के मामले खत्म होने के बाद इसे सूचीबद्ध करेंगे। सीजेआई की पांच जजों की संविधान पीठ राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर दिल्ली-केंद्र के विवाद समेत विभिन्न मामलों पर विचार कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट रामसेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने की मांग वाली भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की जनहित याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर गुरुवार को सहमत हो गया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने भाजपा नेता की दलीलों पर ध्यान दिया कि अभी तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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सीजेआई ने कहा कि हम संविधान पीठ के मामले खत्म होने के बाद इसे सूचीबद्ध करेंगे। सीजेआई की पांच जजों की संविधान पीठ राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर दिल्ली-केंद्र के विवाद समेत विभिन्न मामलों पर विचार कर रही है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने से संबंधित मुद्दे पर विचार कर रहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र से इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कहा था। साथ ही स्वामी को असंतुष्ट होने की स्थिति में दोबारा कोर्ट में आने की स्वतंत्रता दी थी। स्वामी ने कहा था, मैं किसी से नहीं मिलना चाहता। हम एक ही पार्टी में हैं, यह हमारे घोषणा पत्र में था। उन्हें छह सप्ताह या जो भी हो, में फैसला करने दीजिए।
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राम सेतु तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट से पांबन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट से दूर मन्नार द्वीप के बीच चूने के पत्थरों की एक श्रृंखला है। इसे आदम का पुल भी कहा जाता है। भाजपा नेता ने कहा था कि वह मुकदमे का पहला दौर जीत चुके हैं, जिसके तहत केंद्र सरकार ने राम सेतु के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उ

न्होंने कहा कि संबंधित केंद्रीय मंत्री ने उनकी मांग पर विचार करने के लिए 2017 में बैठक बुलाई थी लेकिन बाद में कुछ नहीं हुआ। भाजपा नेता ने इससे पहले की यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में विवादास्पद सेतुसमुद्रम पोत मार्ग परियोजना के खिलाफ अपनी जनहित याचिका में रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा उठाया था।

मामला शीर्ष अदालत में पहुंचा, जिसने 2007 में रामसेतु पर परियोजना के लिए काम रोक दिया। तब केंद्र ने कहा था कि उसने परियोजना के ‘‘सामाजिक-आर्थिक नुकसान’’ पर विचार किया और वह राम सेतु को क्षति पहुंचाए बिना पोत मार्ग परियोजना का दूसरा मार्ग खोजना चाहती है। अदालत ने तब सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

वकीलों को लेकर फैसले की समीक्षा की जरूरत पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह यह देखेगा कि क्या वरिष्ठ वकीलों के पद को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने पर 2017 के उसके फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट वकीलों को वरिष्ट वकील बनाने से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस एसके कौल ने कहा, यहां यह जांचने की गुंजाइश है कि क्या इस फैसले में कुछ संशोधन किया जाना चाहिए या नहीं। अगर हां तो किस हद तक बदलाव होना चाहिए। पीठ में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस अरविंद कुमार भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अक्तूबर 2017 के फैसले में कहा गया था कि इसमें शामिल दिशा-निर्देश मामले के बारे में संपूर्ण नहीं हो सकते हैं। समय के साथ हुए अनुभवों के आधार पर इसमें पुनर्विचार की जरूरत है।

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