वायुसेना की साख पर लगा बट्टा
एमआई-17 5वी हेलीकॉप्टर को वायुसेना की ही मिसाइल से गिराए जाने की घटना ने साख पर सवाल पैदा कर दिया है। सैन्य सूत्र भी इसे बहुत गंभीर घटना मान रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक पूर्व एयर मार्शल ने बताया कि आपरेशन बालाकोट कोई पूर्ण युद्ध नहीं बल्कि एक संक्षिप्त टारगेट बेस्ड आपरेशन था। एक छोटे से सैन्य आपरेशन में तालमेल और आपरेशनल क्षमता की यह कमी वायुसेना की साख पर सवाल उठा रहे हैं।
यह वायुसेना के वार रूम और कमान एंड कंट्रोल प्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। हालांकि सूत्र का कहना है कि वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल ने वायुसेना की चूक मान ली है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होगी, लेकिन सैन्य इतिहास में इसे एक बड़ी लापरवाही माना जाएगा। सूत्र के मुताबिक आपरेशन बालाकोट भारतीय वायुसेना के खाते में दर्ज एक बेहतर सैन्य आपरेशन है, लेकिन सैन्य समीक्षा में इसे अच्छा आपरेशन नहीं कहा जाएगा।
आपरेशन बालाकोट से भारतीय वायुसेना ने लिया सबक
पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुए आपरेशन बालाकोट और उसके बाद युद्ध जैसे हालात से निबटने के प्रयास में भारतीय वायुसेना ने कई सबक लिए हैं। विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान आपरेशन बालाकोट के बाद बनी सैन्य टकराव की स्थिति के हीरो हैं, लेकिन विंग कमांडर द्वारा अपने फाइटर प्लेन के साथ भारतीय सीमा को पार कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश करना, पाकिस्तान के लड़ाकू विमान को हिट करना और इसके बाद उनका पाकिस्तान के क्षेत्र में पैराशूट से उतरना भी एक सबक माना जा रहा है। वायुसेना इसके सभी पहलुओं पर व्यापक अध्ययन करने के बाद अपनी आपरेशनल क्षमता को धार देने में लगी है।