एयरफोर्स के मार्शल की छवि हमेशा से एक बड़े दिल वाले मार्शल की रही है। सैनिकों के कल्याण के प्रति वह हमेशा तत्पर रहे। 1965 के युद्ध का नेतृत्व करने वाले अर्जन सिंह ने दिल्ली में अपना खेत बेच कर 2 करोड़ का फंड बनाया इसे सेवानिवृत्त वायुसेना कर्मियों के कल्याण में लगा दिया। अपनी निजी संपत्ति को सैनिकों के कल्याण में लगाने का यह अद्भुत उदाहरण है।
विभाजन के बाद अर्जन सिंह के परिवार को पंजाब में आदमपुर के नजदीक चिरुवाली गांव में 80 एकड़ जमीन दी गई। अर्जन सिंह ने अपनी जीवनी लिखने वाले लेखक को बताया था कि जब मैंने अपनी जमीन बेची तो इसकी देखभाल करने वाले करतार सिंह को इस पर बना मकान दे दिया।
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मैंने जमीन इसलिए बेच दी कि नौकरी में रहते हुए मैं इसकी देखभाल नहीं कर सकता था। जब मैंने सरदार स्वर्ण सिंह (तत्कालीन विदेश मंत्री) को यह कहा कि मैंने जमीन बेच दी तो उन्होंने मुझे इसे मार्केट रेट से कम पर बेचने के लिए डांट भी पिलाई। अर्जन सिंह ने इस किताब में कहा है कि अब मैं जाट नहीं रहा क्योंकि मेरे पास अब कोई जमीन नहीं है।