ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने शरिया अदालतों के गठन पर अपना रुख नरम करने से इंकार करते हुए जल्द ही ऐसी और छह अदालतों के गठन की घोषणा की है। संस्था की कार्यकारी समिति की बैठक में हलाला का समर्थन करने के साथ ही इस्लामिक कानून की जानकारी देने के लिए देश भर में शरिया क्लास लगाने की भी घोषणा की है। एआईएमपीएलबी ने इन मामलों में मीडिया पर गलतफहमी फैलाने का आरोप भी लगाया।
बैठक के बाद संस्था के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि दारुल कजा जिसे मीडिया शरिया अदालत का नाम दे रहा है, ना तो समानांतर अदालत है और ना ही देश की न्यायिक व्यवस्था को चुनौती है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा इस मामले में अपनी राजनीति चमकाने के लिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इसमें कौम के कुछ मामलों को हल किया जाता है। अगर कोई पक्ष दारुल कजा के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह किसी भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
बैठक में 10 शरिया अदालत के गठन का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इनमें से छह अदालतों का गठन जल्द किया जाएगा। इनमें उत्तर प्रदेश में 2, महाराष्ट्र और गुजरात में एक-एक तथा 2 अन्य राज्यों में गठित किए जाएंगे। जिलानी ने कहा कि बोर्ड ने कभी भी पूरे देश में शरिया अदालत केगठन की बात नहीं कही थी। जिन इलाकों से ऐसी अदालतों के गठन की मांग आएगी या जरूरत महसूस की जाएगी, बोर्ड उस पर गंभीरता से विचार करेगा।
बैठक में हलाला के समर्थन में भी प्रस्ताव पारित किया गया। जिलानी ने कहा कि बोर्ड इसका समर्थन करता है, महिलाओं को इसे मानना ही होगा। इसमें जल्द किसी तरह के बदलाव की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हलाला की प्रक्रिया के दौरान शरियत की अनदेखी होती है।
देश में पहले से हैं सौ शरिया अदालतें
शरिया अदालत के गठन पर विवाद भले ही वर्तमान में हो रहा हो, मगर यह कोई नई बात नहीं है। देश में इस समय पहले से सौ शरिया अदालतें चल रही हैं। बीते दिनों एआईएमपीएलबी के हर जिले में शरिया अदालत के गठन की घोषणा से राजनीति गरमा गई। भाजपा ने इसकी तीखी आलोचना करते हुए कहा था कि बोर्ड देश की न्यायिक व्यवस्था के समानांतर अपनी व्यवस्था खड़ी नहीं कर सकता।