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किशोरी के 22 सप्ताह से अधिक समय के गर्भ को खत्म किया गया: एम्स

Mon, 17 Jun 2019 10:13 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम्स
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने दिल्ली उच्च न्यायालय से सोमवार को कहा कि उसने दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई किशोरी के 22 सप्ताह के गर्भ को खत्म कर दिया है क्योंकि इससे लड़की के शारीरिक और दिमागी विकास पर गंभीर असर पड़ सकता था।
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एम्स ने अदालत को बताया कि इस भ्रूण को संरक्षित कर रख लिया गया है ताकि भविष्य में बलात्कार मामले की जांच के समय उसके डीएनए का पता लगाया जा सके।

उच्च न्यायालय ने गत 14 जून को एम्स से एक मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा था जो इस बात का परीक्षण करे कि इस 14 साल की किशोरी और दुष्कर्म पीड़िता का गर्भ गिराना क्या उचित होगा और आवश्यक हो तो इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया संपन्न करे।

सोमवार को एम्स की ओर पेश हुए वकील ने अदालत को इस फैसले के बारे में बताया और अपनी रिपोर्ट पेश की। 

इस मामले में दो जून को उस समय प्राथमिकी दर्ज की गई जब किशोरी की मां को इस बारे में पता चला। आठ जून को हुई जांच में पता चला कि किशोरी को 22 सप्ताह का गर्भ है। तब लड़की के घरवालों ने बाल कल्याण आयोग से संपर्क किया। आयोग ने उन्हें अदालत में जाने को कहा। 

क्या कहता है कानून

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम, 1971 के अनुसार 20 सप्ताह से अधिक के समय के गर्भ को गिराया नहीं जा सकता। 
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