फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

AIIMS: ट्रॉमा सेंटर के दो ऑपरेशन थिएटर को रोकना पड़ा, तब मंगलवार को पहली बार हुई ऐसी चिकित्सीय प्रक्रिया

आशीष तिवारी
Updated Wed, 22 May 2024 03:35 PM IST

सार

प्रोफेसर कामरान फारूकी कहते हैं कि 42 साल और 27 साल के ब्रेन डेड से अंगों को रिट्रीव करने के लिए उनके विभाग के डॉक्टरों ने पूरी तैयारी पहले से की हुई थी। मंगलवार सुबह 7 बजे शुरू होने वाले इस प्रोसीजर के लिए रूटीन सर्जरी करने वाले ऑपरेशन थिएटर को ऑर्गन रिट्रीव करने के लिए रोकना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
एम्स - फोटो : ANI


एम्स के ट्रॉमा सेंटर में 15 और 16 मई को दो अलग-अलग सड़क दुर्घटना में घायल इलाज कराने के लिए पहुंचे थे। एडवांस ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर कामरान फारूकी कहते हैं कि दोनों मरीजों के ब्रेन डेड होने पर परिजनों की अनुमति के साथ अंग प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई। वह कहते हैं कि मंगलवार सुबह 7 बजे से लेकर दिन के 2 बजे तक दोनों ब्रेन डेड शरीर से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। वह बताते हैं कि एम्स में अभी तक एक साथ दो मरीजों के अंगदान की प्रक्रिया कभी नहीं हुई थी। मंगलवार का दिन संस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन के तौर पर दर्ज हुआ है। प्रोफेसर कामरान कहते हैं कि अंग रिट्रीवल की प्रक्रिया तो कठिन नहीं है लेकिन एक साथ दो लोगों के ब्रेन डेड होने और उसके बाद उनके घर वालों की अनुमति मिलना कठिन हो जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन एम्स ने इतिहास रचते हुए पहली बार दो ब्रेन डेड शरीर से अंग लेकर अलग-अलग मरीजों को जिंदगी दी है। 


प्रोफेसर कामरान फारूकी कहते हैं कि 42 साल और 27 साल के ब्रेन डेड से अंगों को रिट्रीव करने के लिए उनके विभाग के डॉक्टरों ने पूरी तैयारी पहले से की हुई थी। मंगलवार सुबह 7 बजे शुरू होने वाले इस प्रोसीजर के लिए रूटीन सर्जरी करने वाले ऑपरेशन थिएटर को ऑर्गन रिट्रीव करने के लिए रोकना पड़ा। वह कहते हैं कि इस दौरान दो हृदय, चार कॉर्निया, दो लीवर और दो किडनी लिए गए। इसके लिए बाकायदा दिल्ली और हैदराबाद और अहमदाबाद के अलग-अलग संस्थानों से पहले ही तय प्रक्रिया के तहत अंगों के ट्रांसप्लांट की व्यवस्था की गई। प्रोफेसर फारूकी कहते हैं हालांकि अहमदाबाद के अस्पताल में भेजे जाने वाले लीवर को सही नहीं पाया गया इसलिए एक लीवर का रिट्रीवल नहीं हुआ।


एडवांस ट्रॉमा सेंटर में रिट्रीव किए गए एक हार्ट, एक लीवर, तीन किडनी और चार कार्निया तो एम्स में दाखिल मरीजों में प्रत्यारोपित किए गए। जबकि एक लीवर आईएलबीएस के मरीज को दिया गया। एक किडनी और एक हार्ट सेना के रिसर्च एंड रिफेरल इंस्टिट्यूट को दिया जाना था। इसके अलावा एक लीवर अहमदाबाद के एक अस्पताल को भी दिया जाना था। लेकिन वह काम नहीं कर रहा था। एडवांस्डट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉक्टर कामरान फारूकी कहते हैं कि आरआर इंस्टीट्यूट में दिए जाने वाले हृदय के कार्डियक अरेस्ट की वजह से उसको भी नहीं लगाया जा सका। वह कहते हैं कि जिस तरीके से मंगलवार को दो ब्रांडेड के शरीर से अंगों को रिट्रीव कर मरीजों में लगाया गया वह संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर है। वह बताते हैं कि इस साल यह यह छठा ऑर्गन डोनेशन था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next