हाल ही में हुए चुनावों में मिली करारी हार ने एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर गहरी दरार पैदा कर दी है। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन देने के सवाल पर पार्टी के विधायक आपस में बंट गए हैं। इसके साथ ही पार्टी के मुखिया एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के खिलाफ भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
कैसा रहा एआईएडीएमके का चुनाव प्रदर्शन
आंकड़ों की बात करें तो एआईएडीएमके ने कुल 234 सीटों में से 167 पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, पार्टी को केवल 47 सीटों पर ही सफलता मिल सकी। इस खराब चुनावी प्रदर्शन के बाद पार्टी महासचिव पलानीस्वामी ने विधायकों के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों के दौरान पार्टी के अंदर दो अलग-अलग विचार सामने आए।
दो गुट में बंटी पार्टी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, एक गुट सरकार बनाने के लिए टीवीके को किसी भी तरह का समर्थन देने के सख्त खिलाफ है। वहीं, दूसरा गुट चाहता है कि अभिनेता विजय की पार्टी को बाहर से समर्थन दिया जाए। इस खींचतान के बीच कुछ विधायकों ने सीधे तौर पर मांग की है कि हार की जिम्मेदारी लेते हुए पलानीस्वामी को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
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पार्टी में बढ़ते असंतोष का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सी वी शनमुगम और एस पी वेलुमणि जैसे कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री बैठकों में नहीं पहुंचे। उनके समर्थक विधायकों ने भी इन बैठकों से दूरी बनाए रखी। पार्टी के जानकारों का कहना है कि शनमुगम और वेलुमणि का गुट टीवीके को समर्थन देने में दिलचस्पी दिखा रहा है।
क्या बोले एआईएडीएमके के पूर्व नेता
इस बीच एआईएडीएमके के पूर्व नेता के सी पलानीसामी ने इस स्थिति पर कहा कि पार्टी में विभाजन साफ दिख रहा है। कई विधायक नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर पलानीस्वामी पद पर बने रहते हैं, तो संभव है कि कुछ विधायक टीवीके के साथ चले जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी की एकता और अगले चुनाव की तैयारी के लिए पलानीस्वामी को खुद पद छोड़ देना चाहिए। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक सत्यालय रामकृष्णन ने कहा कि नेताओं को आपसी मतभेद बातचीत से खत्म करने चाहिए।
विधानसभा में भी दिखा फूट का असर
इस बीच चेन्नई में 17वीं तमिलनाडु विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। इस दौरान एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर की फूट साफ नजर आई। पार्टी के विधायक एक साथ आने के बजाय दो अलग-अलग समूहों में विधानसभा पहुंचे। आमतौर पर एआईएडीएमके के सभी सदस्य विधानसभा के गेट पर इकट्ठा होते हैं और एक साथ अंदर जाते हैं, लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल अलग था।
पहले समूह में पार्टी महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी के साथ पूर्व मंत्री के पी मुनुसामी और थलवई एन सुंदरम शामिल थे। इसके कुछ देर बाद दूसरा समूह पूर्व मंत्री एस पी वेलुमणि के नेतृत्व में पहुंचा, जिसमें डॉ. सी विजयभास्कर भी मौजूद थे। जबकि पूर्व मंत्री सी वी शनमुगम समय पर नहीं पहुंच सके।
बता दें कि अप्रैल के चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण नेतृत्व बदलने की मांग उठ रही है। पार्टी इन चुनावों में सिर्फ 47 सीटें ही जीत सकी है। शपथ ग्रहण के दौरान पनरुटी से विधायक के मोहन काफी भावुक हो गए। सदन में दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की तस्वीर देखकर वह रोने लगे। उन्होंने जयललिता को 'अम्मा' कहकर याद किया और रोते हुए अपने हस्ताक्षर किए। इससे पहले, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सबसे पहले विधायक के रूप में शपथ ली।
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