तमिलनाडु अन्नाद्रमुक महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने शनिवार को द्रमुक सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य में डेल्टा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कावेरी नदी से तुरंत आवश्यक पानी छोड़ने के लिए पड़ोसी राज्य कर्नाटक पर दबाव बनाएं।
अन्नाद्रमुक महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने शनिवार को द्रमुक सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य में डेल्टा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कावेरी नदी से तुरंत आवश्यक पानी छोड़ने के लिए पड़ोसी राज्य कर्नाटक पर दबाव बनाएं। पलानीस्वामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से कर्नाटक के सीएम से तमिलनाडु के लिए 86.380 टीएमसी कावेरी जल सुरक्षित करने की मांग की।
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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बेंगलुरु जाना चाहिए
अन्नाद्रमुक नेता पलानीस्वामी ने कहा कि वर्तमान में कर्नाटक के पास 80 फीसदी पानी है और इसलिए, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को बेंगलुरु जाना चाहिए और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ बातचीत करनी चाहिए और कावेरी के जल को तमिलनाडु के लिए लाना चाहिए।
सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से बात करें स्टालिन
पलानीस्वामी ने कहा कि पानी छोड़ने से 3.5 लाख एकड़ में डेल्टा फसलों को बचाया जा सकेगा। साथ ही बताया कि कर्नाटक ने जून (9.19 टीएमसी), जुलाई में (31.24 टीएमसी) और अगस्त में (45.9 टीएमसी) कुल 86.3 टीएमसी पानी नहीं छोड़ा है। उन्होंने कहा कि सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार उनके गठबंधन का हिस्सा हैं, उनको उनके साथ बातचीत करनी चाहिए।
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आगे अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का भी कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि वे अपने सहयोगी से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि वह कावेरी का पानी छोड़े। पलानीस्वामी ने कहा कि हालांकि मुख्यमंत्री ने 12 जून से मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की घोषणा की है, लेकिन यह डेल्टा क्षेत्र में कुरुवई की खेती के लिए पर्याप्त नहीं है।
कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद कावेरी जल मुद्दा फिर से उभरा
साथ ही उन्होंने कहा कि कर्नाटक में द्रमुक की सहयोगी कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद कावेरी जल मुद्दा फिर से उभर आया है। पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक ने मुख्यमंत्रियों, एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के दौर से ही और जब वह मुख्यमंत्री थे, तब भी राज्य के हितों की रक्षा की थी और उस कठिन कानूनी लड़ाई को याद किया जिसके कारण तमिलनाडु को कावेरी जल से अपना उचित हिस्सा प्राप्त हुआ था।