हाल ही में एआईएडीएमके के नेता और पूर्व राज्यमंत्री कदम्बुर राजू ने कहा था कि जयललिता के नेतृत्व में एआईएडीएमके ने किसी कारणवश वाजपेयी सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया था और इस ऐतिहासिक भूल के कारण बाद में डीएमके ने भाजपा का समर्थन किया।
1999 में अन्नाद्रमुक (AIADMK) का एनडीए से बाहर निकलना ऐतिहासिक भूल वाले बयान पर पूर्व राज्यमंत्री कदम्बुर राजू ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा था। मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था।
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हाल ही में थुथुकुडी जिले में एआईएडीएमके और भाजपा कार्यकर्ताओं की एक संयुक्त बैठक में बोलते हुए कदम्बुर राजू ने कहा था कि जयललिता के नेतृत्व में एआईएडीएमके ने किसी कारणवश वाजपेयी सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया था और इस ऐतिहासिक भूल के कारण बाद में डीएमके ने भाजपा का समर्थन किया और केंद्र सरकार में सत्ता साझा की, जो 14 साल तक चली। उन्होंने कहा था कि भाजपा ने डीएमके को सशक्त बनाया था। लेकिन डीएमके को इसका कोई सम्मान नहीं है।
राजू के बयान की पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने आलोचना की और कहा कि उनकी टिप्पणी एक ऐतिहासिक भूल है। पन्नीरसेल्वम ने कहा कि अम्मा जयललिता के कदम के कारण एआईएडीएमके 2001 में राज्य में सत्ता में आई और 2014 के लोकसभा चुनावों में 40 में से 37 सीटें जीतीं। वास्तव में भाजपा से समर्थन वापस लेने का जयललिता का निर्णय एक ऐतिहासिक क्रांति थी।
अपना बयान वायरल होने के बाद राजू ने 30 जुलाई को स्पष्टीकरण दिया कि निहित स्वार्थों के कारण उनके भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने कभी ऐतिहासिक भूल शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। मेरा मतलब था कि एआईएडीएमके द्वारा भाजपा गठबंधन से समर्थन वापस लेने के परिणामस्वरूप डीएमके भाजपा के साथ जुड़ गई। वह केवल इस बात पर बोल रहे थे कि एआईएडीएमके का भाजपा के साथ गठबंधन खराब था, जबकि डीएमके का उसके साथ गठबंधन अच्छा था।