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NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए किंगमेकर की भूमिका में AIDMK, BJD और TRS

Fri, 16 Jun 2017 09:29 AM IST
amarujala.com- Presented: अभिषेक तिवारी
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presidential election 2017 - फोटो : social media
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20 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को लेकर मंच सज चुका है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी अपनी तरफ से मोर्चाबंदी तेज कर दी है। पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि भाजपा अपने उम्‍मीदवार के तौर पर किसका नाम तय करती है क्योंकि उसी उम्‍मीदवार के नाम पर ही एनडीए के घटक दल अपनी मुहर लगाएंगे ऐसे में उसकी जीत भी तय मानी जा रही है। वहीं, विपक्षी दल भी भाजपा की तरफ ही मुंह करके बैठे हैं, उन्हें भी इंतजार सत्ता पक्ष के उम्‍मीदवार का है, मनमाफिक उम्‍मीदवार न दिखने पर विपक्ष अपनी राह अलग कर सकता है।
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  राष्ट्रपति चुनाव में 5.27 लाख वोटों के साथ एनडीए जादुई संख्या से 20,390 मतों की संख्या कम है। यदि स्वतंत्र निर्वाचकों ने एनडीए के साथ वोट किया है, तो उसे लगभग 5000 मतों की आवश्यकता होगी।  हालांकि, यह संभव नहीं लगता कि भाजपा सभी स्वतंत्र विधायकों और सांसदों का समर्थन हासिल कर सके। इसलिए तटस्थ पार्टी के वोटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। 

इसलिए इस बार माना जा रहा है कि एनडीए के लिए राष्ट्रपति चुनाव में तमिलनाडु के व अन्य गैर-संप्रगित दल एआईएडीएमके, बीजेडी और टीआरएस खास भूमिका निभा सकते हैं। क्योंकि तमिलनाडु को सालों से कृषि संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। और ओडिशा में बीजेडी सत्तारूढ़ को पर्याप्त केंद्रीय सहायता की आवश्यकता है, दूसरे राज्य को केंद्र सरकार की सहायता और तेलंगाना में टीआरएस की अपनी सत्तारूढ़ जरूरतें हैं। अगर वोट का प्रतिशत देंखे तो एआईएडीएमके के पास 59,000 वोट हैं जबकि बीजेडी के पास 36,500 वोट हैं और टीआरएस को राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज में 23,200 वोट मिले हैं।
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भारत के राष्ट्रपति का चुनाव करने में वोट संख्याओं की राजनीति का मुख्य स्थान है। बताते चले कि 2012 में जब प्रणव मुखर्जी भारत के राष्ट्रपति चुने गए थे, तब उन्हें कुल वोट का लगभग 69 प्रतिशत मिला था, जो लगभग 10.99 लाख होता है।
किसी उम्मीदवार को भारत के राष्ट्रपति बनने के लिए आधे से अधिक एक वोट की आवश्यकता होती है। हालांकि राष्ट्रपति चुनाव इतने आसान नहीं होता हैं, जितना दिखता है। पांच साल पहले पिछले चुनाव में एक सत्तारूढ़ गठबंधन के तौर पर यूपीए सरकार के पास केवल 33 प्रतिशत वोट थे। यह राजग में एनडीए के उम्मीदवार पीए संगमा को हराने के लिए काफी था। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के मतदान पूल में लगभग 47.5 प्रतिशत का हिस्सा है।
ये है मौजूदा चुनाव का गणित- 
इस बार के राष्ट्रपति चुनाव के मतदान में एनडीए का 47.5 फीसदी हिस्सा है जबकि पूरी संख्या 5.27 लाख है। लेकिन, विपक्षी संप्रग और भाजपा ने वोटों को घोषित कर 4.34 लाख तक जोड़ा है। 
मौजूदा चुनाव में कुल 4120 विधायक और लोकसभा-राज्यसभा के 776 सांसद वोट डालेंगे।
-फिलहाल केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए के सांसद और विधायकों के हिसाब से कुल 532019 वोट हैं।
-जीत के लिए उसे कुल 549442 वोटों की जरूरत है यानि उसके पास 17423 वोट कम हैं।
-हालांकि मोटा मोटी ये संख्या 20 से 25 हजार तक भी हो सकती है
-एनडीए के इस आंकड़े में फिलहाल शिवसेना के सांसदों और विधायकों का वोट भी शामिल है
-अगर शिवसेना भाजपा को समर्थन नहीं करती है तो उसके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी, उस कड़ी में उसे 50 हजार तक वोटों का जुगाड़ करना होगा।
-शिवसेना के 63 विधायक हैं और महाराष्ट्र विधानसभा में एक विधायक का मत है 175, यानि शिवसेना विधायकों के कुल मतों का जोड़ हुआ 11025 वोट।
-संसद में शिवसेना के पास राज्यसभा और लोकसभा मिलाकर कुल 21 सांसद हैं, एक सांसद के वोट का मूल्य है 708, यानि कुल मतों का जोड़ हुआ 14868 वोट। कुल जमा शिवसेना के पास फिलहाल 25893 वोट सुरक्षित हैं। और भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि ये वोट उसके पाले से छिटककर विपक्ष के खेमे में जाएं।
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