लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि भारत में ऐसे डाटा की कमी है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणाली में डाला जा सके। उन्होंने कहा कि डाटा ने उभरती एआई तकनीक को बढ़ावा दिया है। राहुल गांधी ने यह बात बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कही।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'लोग एआई के बारे में बात करते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि एआई डाटा पर काम करता है। बिना डाटा के एआई का कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारत का अधिकांश डाटा विदेश में संग्रहित होता है।
उन्होंने कहा, 'अगर हम आज के डाटा पर नजर डालें तो यह साफ है कि जो भी डाटा दुनियाभर में मोबाइल फोन बनाने, इलेक्ट्रिक कार बनाने या अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने के लिए इस्तेमाल होता है, वह चीन के पास है। वहीं, उपभोक्ता डाटा (जैसे लोग इंटरनेट पर क्या खरीदते हैं या उपयोग करते हैं) अमेरिका के पास है। जबकि, चीन का उपभोग डाटा का स्वामित्व उनके अपने देश के पास है।'
उन्होंने कहा, 'चीन में उपभोक्ता डाटा उनके अपने देश में होता है। लेकिन भारत में गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसी कंपनियां हमारे उपभोक्ता डाटा को नियंत्रित करती हैं। अगर भारत एआई के बारे में बात करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले इस सवाल का जवाब देना होगा कि वह एआई को चलाने के लिए कौन सा डाटा इस्तेमाल करेगा?'
'भारत के पास न उत्पादन डाटा है, न उपभोक्ता डाटा'
रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने कहा, भारत के पास न तो उत्पादन डाटा है, न ही उपभोक्ता डाटा। हमने अपना उपभोक्ता डाटा अमेरिका की बड़ी कंपनियों को दे दिया है और उत्पादन डाटा हमारे पास नहीं है। ऐसे में भारत का विजन क्या होगा? उन्होंने बताया कि भारत दुनिया की 20 फीसदी आबादी है और 20 फीसदी डिजिटल डाटा पैदा करता है। लेकिन इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही भारत में संग्रहित होता है, जबकि बाकी डाटा विदेश में रहता है।
'डाटा के स्थानीयकरण पर काम करे देश'
राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को डाटा के स्थानीयकरण पर काम करना चाहिए। डाटा स्थानीयकरण का मतलब है कि डाटा को एक निश्चित भौगोलिक स्थान पर संग्रहित और प्रोसेस किया जाए, ताकि देश के डाटा पर उसका नियंत्रण बना रहे।
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