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AI से खुला मातृत्व का नया रास्ता: माता-पिता बनने के सपनों को लगे पंख, आईवीएफ में तकनीक ने बदली किस्मत

Tue, 16 Dec 2025 05:52 AM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला नेटवर्क

सार

AI IVF Technology: आईवीएफ प्रक्रिया में एआई तकनीक ने बांझपन के इलाज को नई दिशा दी है। भ्रूण चयन और समय निर्धारण में एआई की मदद से सफलता दर बढ़ी है। डॉक्टरों को डेटा आधारित निर्णय में सहयोग मिल रहा है।
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आईवीएफ - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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बांझपन से जूझ रहे लाखों दंपतियों के लिए आईवीएफ लंबे समय से उम्मीद की किरण रहा है, लेकिन इसकी जटिलता, ऊंची लागत और अनिश्चित सफलता दर कई बार निराशा भी देती रही है। अब इसी प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की एंट्री ने चिकित्सा विज्ञान में नया अध्याय जोड़ दिया है। पहली बार ऐसे आईवीएफ शिशुओं का जन्म हो रहा है, जिनके गर्भधारण में एआई की प्रत्यक्ष भूमिका रही है। यह बदलाव माता-पिता बनने के सपनों को नई उड़ान देता नजर आ रहा है।

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आईवीएफ प्रक्रिया में एआई तकनीक के इस्तेमाल से भ्रूण चयन और समय निर्धारण अधिक सटीक हुआ है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि एआई न केवल सफलता दर बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि इस भावनात्मक रूप से कठिन प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद भी बना रही है। एआई आधारित प्रणालियां अब हजारों पुराने आईवीएफ मामलों के डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय में सहयोग दे रही हैं।

सबसे कठिन चरण को बनाया आसान
आईवीएफ में सबसे चुनौतीपूर्ण चरण होता है स्वस्थ भ्रूण का चयन। अब तक भ्रूणविज्ञानी माइक्रोस्कोप से भ्रूण की बनावट देखकर निर्णय लेते थे। एआई आधारित सिस्टम भ्रूण की कोशिकीय संरचना, विभाजन की गति और विकास के पैटर्न का गहराई से अध्ययन करता है। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि कौन सा भ्रूण गर्भ में प्रत्यारोपण के बाद सफलतापूर्वक विकसित होने की सबसे ज्यादा संभावना रखता है।
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सही समय पर सही फैसला
एआई तकनीक लैब में विकसित हो रहे भ्रूणों की हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग और टाइम-लैप्स वीडियो का विश्लेषण करती है। इससे यह तय करने में मदद मिलती है कि भ्रूण को गर्भ में प्रत्यारोपित करने का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है। सही समय पर किया गया प्रत्यारोपण सफलता की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है।

मानवीय भूल की संभावना कम
आईवीएफ में अंतिम निर्णय डॉक्टर ही लेते हैं, लेकिन एआई उन्हें एक वैज्ञानिक और डेटा आधारित दूसरी राय देता है। इससे मानवीय भूल की संभावना घटती है और निर्णय अधिक संतुलित हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि एआई किसी डॉक्टर की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनके फैसलों को मजबूत बना रहा है।
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आईवीएफ बनेगा ज्यादा न्यायसंगत
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि एआई तकनीक आईवीएफ को अधिक सटीक, किफायती और व्यापक बनाएगी। इससे उन दंपतियों को भी लाभ मिलेगा, जो बार-बार असफल प्रयासों से टूट चुके हैं। चिकित्सा जगत में इसे बांझपन के इलाज की दिशा में एक बड़ी और सकारात्मक क्रांति माना जा रहा है।

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