कृषि मंत्री ने आगे कहा कि आप विश्वास रखिए, किसानों के हितों में किए गए ये सुधार भारतीय कृषि में नए अध्याय की नींव बनेंगे। देश के किसानों को और स्वतंत्र करेंगे, सशक्त करेंगे। तोमर ने कहा कि सरकार एमएसपी पर लिखित में आश्वासन देने को तैयार है। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि एमएसपी जारी है और जारी रहेगी।
किसान हित में सरकारी योजनाएं गिनाईं
आठ पन्ने के पत्र में तोमर ने कहा है कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास के मंत्र पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने बिना किसी भेदभाव सभी का हित करने का प्रयास किया। पिछले छह वर्षों का इतिहास इसका साक्षी है। पिछले छह साल में हमारी सरकार ने किसानों का मुनाफा बढ़ाने और खेती को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनका फायदा छोटे किसानों को मिल रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए छह हजार रुपये सालाना देने का मकसद यही था कि इन किसानों को कर्ज न लेना पड़े। फसल बीमा, सॉयल हेल्थ कार्ड और नीम कोटिंग यूरिया जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं। किसानों के सामने दिक्कत थी कि ज्यादातर गोदाम और कोल्ड स्टोरेज सेंटर गांवों से दूर शहरों के पास बने थे। इससे किसानों को उनका फायदा नहीं मिलता था। इसके के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये का फंड बनाया है।
कृषि मंत्री ने किसानों से यह अपील की
नरेंद्र सिंह तोमर ने आगे लिखा, मैं किसान परिवार से आता हूं। खेती की बारीकियां और खेती की चुनौतियां दोनों को ही देखते हुए, समझते हुए, मैं बड़ा हुआ हूं। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री के तौर पर मेरे लिए ये बहुत संतोष की बात है कि नए कानून लागू होने के बाद इस बार एमएसपी पर सरकारी खरीद के भी पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। ऐसे समय में जब हमारी सरकार एमएसपी पर खरीद के लिए नए रिकॉर्ड बना रही है, खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ रही है, कुछ लोग किसानों से झूठ बोल रहे हैं कि एमएसपी बंद कर दी जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की वो राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित कुछ लोगों द्धारा फैलाए जा रहे इस सफेद झूठ को पहचानें और सिरे से खारिज करें।
बता दें कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के नाम यह पत्र तब लिखा है, जब सरकार और दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों के बीच वार्ता रुक चुकी है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। वहीं, सरकार ने किसानों को संशोधन का प्रस्ताव दिया था, जिसे ठुकरा दिया गया। पांच दौर की वार्ता असफल रहने के बाद सरकार और किसानों में फिलहाल बातचीत ठप है।