केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्तूबर को 'पीएम धन-धान्य योजना' और 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' की शुरुआत करेंगे। नई दिल्ली के पूसा कैंपस से इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ होगा। कृषि मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत दुनिया का फूड बास्केट बनेगा।
देश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्तूबर को लोकनायक जयप्रकाश की जयंती पर दिल्ली के पूसा संस्थान में दो महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत खाद्यान्न के लिए अब किसी पर निर्भर नहीं रह सकता है, इसलिए दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करना जरूरी है। इसके साथ ही पीएम मोदी डीप सी फिशिंग नीति की शुरुआत भी करेंगे और पशुपालन, मत्स्य व खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े 3,000 करोड़ रुपये की 56 परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे।
विज्ञापन
मिशन दलहन से 6 साल में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
छह वर्षीय आत्मनिर्भर दलहन मिशन 11,440 करोड़ रुपये की लागत से 2025-26 से शुरू होगा। देश ने वर्ष 2030-31 तक दालों के उत्पादन को 40 प्रतिशत बढ़ाकर 350 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। दालों की खेती का क्षेत्रफल 275 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 310 लाख हेक्टेयर होगा। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 880 किलोग्राम से बढ़ाकर 1130 किलोग्राम तक लेकर जाने का लक्ष्य है।
प्रस्सकंरण के लिए भी किसानों को खेत में सुविधा दी जाएगी
उत्पादन बढ़ोतरी के लिए अनुसंधान और विकास करके किसानों तक रोग-प्रतिरोधी और उच्च उत्पादकता वाले बीज पहुंचाए जाएंगे। 88 लाख निशुल्क बीज मिनी किट के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्सकंरण के लिए भी किसानों को खेत में सुविधा दी जाएगी। इसके लिए 1 हजार प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। जिन पर सरकार 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी। शिवराज सिंह चौहान ने एलान किया कि किसानों के हितों को देखते हुए अंधाधुंध आयात पर जल्द फैसला होगा।
पीएम धन-धान्य योजना से बढ़ेगी उत्पादकता
प्रधानमंत्री 24,000 करोड़ रुपये की लागत वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का भी शुभारंभ करेंगे। इस योजना में 100 ऐसे जिलों को चयनित किया गया है, जिनकी कृषि उत्पादकता कम है। इन जिलों को राष्ट्रीय औसत तक लाने के लिए सिंचाई व्यवस्था, भंडारण, और केसीसी ऋण सुविधा सहित अन्य प्रयत्न किए जाएंगे। इसके लिए नीति आयोग डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी करेगा और 11 विभागों की 36 योजनाओं का कॉन्वर्जन करके उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास करेगा।