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Agni Prime: अब चलती ट्रेन से लॉन्च होकर दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर देगी अग्नि-प्राइम मिसाइल, हुआ सफल परीक्षण

Thu, 25 Sep 2025 09:02 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

इस सफल उड़ान परीक्षण ने भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास मोबाइल रेल नेटवर्क से मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता है।
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अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण। - फोटो : RMO
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विस्तार
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भारत ने अग्नि प्राइम मिसाइल की ट्रेन से लॉन्चिंग का सफल परीक्षण कर लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार सुबह इसकी जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि मध्यम रेंज की अग्नि प्राइम मिसाइल को रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से दागा जा सकेगा। यह अगली पीढ़ी की मिसाइल ट्रेन से ही लॉन्च होकर 2000 किलोमीटर तक की रेंज में किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है। 
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राजनाथ सिंह के पोस्ट में आगे कहा गया, "इस मिसाइल को कई और अहम विशेषताओं से सुसज्जित है। इसे आज विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से किया गया। यह अपनी तरह का पहला लॉन्च है, जो कि बिना किसी पूर्व शर्त के रेल नेटवर्क पर चलने की क्षमता रखता है। 
 



इस सफल उड़ान परीक्षण ने भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास मोबाइल रेल नेटवर्क से मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस प्रणाली से कम प्रतिक्रिया के समय में प्रक्षेपण करने की सुविधा मिलती है। उन्होंने मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम मिसाइल के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ, सामरिक बल कमान (एसएफसी) और सशस्त्र बलों को बधाई दी। 
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अग्नि प्राइम में खास क्या है?
अग्नि प्राइम कई उन्नत एवं नई सुविधाओं से युक्त मिसाइल है। इसमें नई प्रणोदन प्रणाली और समग्र रॉकेट मोटर केसिंग के साथ-साथ उन्नत नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणाली शामिल की गई है। यह एक कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली पर आधारित मिसाइल है। 

कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली क्या होती है?
एक कैनिस्टर-लॉन्च प्रणाली किसी मिसाइल को लॉन्च करने के समय को कम करती है। इसके साथ ही इसकी वजह से मिसाइल का परिचालन भी सुगम होता है। जरूरत पड़ने पर इसे रेल या सड़क मार्ग से आसनी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है। 

क्यों अहम है अग्नि प्राइम का परीक्षण?
यह त्रि-सेवा सामरिक बल कमांड (एसएफसी) द्वारा आयोजित अग्नि-प्राइम का प्रथम प्री-इंडक्शन नाइट लॉन्च था , जो देश के परमाणु शस्त्रागार को संभालता है। अग्नि-प्राइम धीरे-धीरे एसएफसी के शस्त्रागार में अग्नि-I (700 किमी) मिसाइलों की जगह लेगा, जिसमें पृथ्वी-II (350 किमी), अग्नि-II (2,000 किमी), अग्नि-III (3,000 किमी) और अग्नि-4 (4,000 किमी) बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। 

नई मिसाइल भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों के किसी खतरे के खिलाफ मजबूती प्रदान करेगी। जहां अग्नि-V पूरे चीन को अपने हमले के दायरे में लाती है, वहीं अग्नि प्राइम को पाकिस्तान को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। अप्रैल में, भारत ने अपने महत्वाकांक्षी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के हिस्से के रूप में ओडिशा के तट पर एक जहाज से एंडो-वायुमंडलीय इंटरसेप्टर मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक किया था।
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बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम कर रहा भारत
भारत पिछले दो दशकों में विभिन्न बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत सटीक-ताकतवर रक्षा उत्पाद और संबंधित प्लेटफॉर्म को विकसित करने में भी लगा हुआ है। भारत का फोकस अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाने पर है। इसी के तहत भारत ने ‘अग्नि’ शृंखला की मिसाइलों के विभिन्न रूपों को विकसित किया है।

पिछले दिसंबर में भारत ने परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जो 5,000 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। अग्नि 1 से 4 मिसाइलों की रेंज 700 किलोमीटर से 3,500 किलोमीटर तक है और उन्हें पहले ही तैनात किया जा चुका है।
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