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Agneepath Scheme: अग्निवीरों के लिए कौशल आधारित स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा शिक्षा मंत्रालय, इग्नू के साथ होगा समझौता

Thu, 16 Jun 2022 04:41 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिकारियों ने कहा कि सेना, नौसेना और वायु सेना, इस योजना के कार्यान्वयन के लिए इग्नू के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे।
 
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सेना भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोदी सरकार की नई योजना 'अग्निपथ' के अग्निवीरों के कैरियर की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय एक विशेष तीन वर्षीय कौशल आधारित स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा। अधिकारियों ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।  इस पाठ्यक्रम के जरिए रक्षा बलों में उनके कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा प्राप्त कौशल प्रशिक्षण को मान्यता दी जाएगीा। 

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इग्नू के साथ होगा समझौता 
अधिकारियों ने बताया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) इस डिग्री प्रोग्राम को तैयार करेगा। रोजगार और शिक्षा के लिए भारत और विदेशों दोनों में इस स्नातक डिग्री कार्यक्रम को मान्यता दी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि सेना, नौसेना और वायु सेना, इस योजना के कार्यान्वयन के लिए इग्नू के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे।

मंगलवार को लांच हुई 'अग्निपथ' योजना
गौरतलब है कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सेना, नौसेना और वायु सेना में सैनिकों की भर्ती के लिए 'अग्निपथ' योजना लांच की थी। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे। सेना यूथफुल होगी। योजना के तहत सेना में भर्ती होने वालों को अग्निवीर कहा जाएगा। सेना में अभी औसत उम्र 32 साल है जो अगले छह से सात साल में घटकर 24 से 26 साल के बीच आ जाएगी। इस योजना को रक्षा बलों के खर्च को कम करने की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा भी माना जा रहा है। 'अग्निपथ' योजना के तहत, भारतीय युवाओं को सशस्त्र बलों में 'अग्निवीर' के रूप में सेवा करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
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शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये डिग्री प्रोग्राम अग्निवीरों द्वारा प्राप्त इन-सर्विस प्रशिक्षण को स्नातक की डिग्री के रूप में मान्यता देगा और उनके लिए अपनी पसंद के करियर को आगे बढ़ाने के अवसर खोलेगा। 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बनाया जाएगा पाठ्यक्रम
यह स्नातक डिग्री कार्यक्रम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क और राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के मानदंडों के अनुरूप है। कार्यक्रम की रूपरेखा को संबंधित नियामक निकायों जैसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) और यूजीसी द्वारा विधिवत मान्यता दी गई है।

अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम के मुताबिक, प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर स्नातक प्रमाणपत्र, प्रथम और द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर स्नातक डिप्लोमा और तीन साल की समय सीमा में सभी पाठ्यक्रमों के पूरा होने पर डिग्री दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डिग्री यूजीसी नामकरण के अनुसार इग्नू द्वारा प्रदान की जाएगी। इसमें बीए, बीकॉम, बीए (व्यावसायिक), बीए (पर्यटन प्रबंधन) जैसे कोर्स कराए जाएंगे।रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में इनकी भारत और विदेश दोनों में मान्यता होगी।

  • इसका मकसद भविष्य में अग्निवीरों की पेशेवर संभावनाओं को मजबूत करना और उन्हें असैन्य क्षेत्र की नौकरियों के लिए तैयार करना होगा।
  • डिग्री के लिए जरूरी 50 फीसदी अंक पाठ्यक्रम कौशल प्रशिक्षण से जबकि 50 फीसदी अन्य विषयों से दिए जाएंगे।
  • शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पाठ्यक्रम का डिजाइन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) तैयार करेगा और डिग्री भी देगा।
  • कार्यक्रम यूजीसी के मानदंडों व राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अनिवार्य राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क/राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क से जुड़ा होगा। प्रथम वर्ष में प्रमाणपत्र, प्रथम व द्वितीय वर्ष में डिप्लोमा और तीन साल में सभी कोर्स पूरा होने पर डिग्री दी जाएगी।

भारत और विदेश दोनों जगह रोजगार के लिए मान्य होगी
डिग्री कार्यक्रम को संबंधित नियामक निकायों अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) और यूजीसी द्वारा विधिवत मान्यता दी जाएगी।

  • डिग्री इग्नू द्वारा यूजीसी से स्वीकृत बीए, बी कॉम, बीए-पर्यटन प्रबंधन और व्यावसायिक की ही मिलेगी।
  • रोजगार व आगे की पढ़ाई के लिए भारत व विदेश, दोनों में डिग्री मान्य होगी। इसके लिए सेना की तीनों शाखाएं इग्नू के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगी।

आने वाले महीनों में 40 हजार सैनिकों की भर्ती करेगी सेना
सेना में अग्निपथ योजना के तहत 7 महीनों में 40 हजार जवानों की भर्ती होगी। चार साल के कार्यकाल के लिए अनुबंध के आधार पर ये भर्तियां होंगी। भर्ती के लिए देश के सभी 773 जिलों में अभियान चलाया जाएगा। वहीं, नौसेना व वायुसेना ने एक साल में क्रमश: 3000 व 3500 अग्निवीरों को भर्ती का लक्ष्य तय किया है।

थलसेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने बुधवार को बताया कि पहले 180 दिनों में 25 हजार भर्तियां होंगी। उसके अगले महीने से 15 हजार अग्निवीरों की भर्ती शुरू की जाएगी। लेफ्टिनेंट जनरल राजू ने बताया, रक्षा मंत्रालय सभी संचालन जरूरतों को पूरा करने और आवश्यक बदलाव करने के लिए सक्षम है। 

वहीं, पश्चिमी नौसेना कमान के कमांडर इन चीफ वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह ने बताया, नौसेना इस साल 3,000 अग्निवीरों की ही भर्ती करेगी। इसके बाद जरूरत और स्वीकृत क्षमता के आधार पर भर्ती बढ़ाई जाएगी। वायुसेना में 3500 अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। मध्य कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने बताया, मिशन अग्निपथ के तहत यूपी व उत्तराखंड में अगस्त से भर्ती रैलियां शुरू होंगी।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत चार राज्य पुलिस सेवा में देंगे वरीयता
उत्तर प्रदेश समेत चार राज्य अग्निपथ योजना से चार साल के कार्यकाल के बाद सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को अपने यहां पुलिस सेवा में वरीयता देंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह एलान किया। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश ने भी इसकी घोषणा की है। हरियाणा में सभी सरकारी नौकरियों में वरीयता मिलेगी।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल व असम राइफल्स की भर्ती में मिलेगी प्राथमिकता
गृह मंत्रालय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल्स की भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देगा। गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि अग्निपथ योजना युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक दूरदर्शी और स्वागत योग्य निर्णय है। इस संदर्भ में गृह मंत्रालय ने इस योजना के तहत चार साल पूरे कर चुके अग्निवीरों को लेकर योजना बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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