केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगरतला में कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं में कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने दोनों को एक ही मां की दो बहनें बताया। शाह ने कहा कि हिंदी के विकास से क्षेत्रीय भाषाएं भी मजबूत होती हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को अपनाकर आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पूर्वोत्तर भारत के दौरे पर रहे। उन्होंने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में एक अहम कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने पूर्वी, पूर्वोत्तर और उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम हापनिया के इंटरनेशनल फेयर कॉम्प्लेक्स में आयोजित हुआ, जिसमें इन क्षेत्रों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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क्या बोले गृह मंत्री?
सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के रिश्ते पर बड़ी बात कही। उन्होंने साफ किया कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं के बीच कभी कोई टकराव नहीं हो सकता। उन्होंने इन भाषाओं को 'एक ही मां की दो बहनें' बताया। शाह ने कहा कि हिंदी सभी भाषाओं की सहेली है। जब हिंदी को बढ़ावा मिलता है, तो बाकी भारतीय भाषाएं भी अपने आप मजबूत होती हैं।
गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश अपनी भाषा को सीखने और अपनाने के संकल्प के साथ मजबूती से खड़ा है। इस सम्मेलन में राजभाषा नीति को लागू करने और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
भाजपा के कामों कि की तारीफ
त्रिपुरा आने से पहले, दिन में अमित शाह ने असम के सिलचर में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के विकास कार्यों की जमकर तारीफ की। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो काम कांग्रेस पार्टी पचास साल के शासन में हासिल नहीं कर सकी, उसे भाजपा ने सिर्फ दस साल में पूरा कर दिखाया है।
उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में असम में बुनियादी ढांचे पर बहुत काम हुआ है। राज्य में हर रोज 14 किलोमीटर सड़क बनी है। इसके अलावा सैकड़ों पुलों का निर्माण पूरा किया गया और चार बड़े नए पुलों का उद्घाटन हुआ है। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राज किया, लेकिन असम के विकास पर ध्यान नहीं दिया, जबकि भाजपा ने राज्य की तस्वीर बदल दी है।