राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर कुछ नहीं कहा। प्रधानमंत्री ने साक्षात्कार के दौरान स्मिता प्रकाश के सवालों से बड़ी ही चालाकी से बचने की कोशिश की। स्मिता प्रकाश ने अपने सवाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सवाल, आरोप का जिक्र किया।
पत्रकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी को प्रधानमंत्री का दोस्त बताकर अपने सवाल को इनकारपोरेट किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सवाल पर साफ-साफ बचते नजर आए। प्रधानमंत्री ने न तो राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही राहुल गांधी के आरोपों पर कोई सफाई दिए। इसके समानांतर प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी पर ही बोलने की बीमारी का आरोप जड़ दिया।
प्रधानमंत्री ने इस पर भी कोई सफाई नहीं दी कि आखिर फ्रांस की लड़ाकू विमान निर्माता कंपनी द्वारा अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर बनाने में उनकी भूमिका थी या नही। हां, प्रधानमंत्री ने एक सफाई जरूर दी कि उनके ऊपर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया गया है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे चौकीदार को चोर कहा है।
इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री केवल फ्रांस के पूर्व और वर्तमान राष्ट्रपति के वक्तव्य, संसद में दिए गए खुद के वक्तव्य (प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद तमाम कांग्रेस पार्टी ने नये तथ्यों के साथ आरोप लगाया था), उच्चतम न्यायालय द्वारा सौदे की जांच के एसआईटी गठित करने की याचिका को खारिज करने का सहारा लेते रहे।
समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री पत्रकार के साथ साक्षात्कर में रक्षात्मक तरीके से चल रहे थे। प्रधानमंत्री का यह रुख विपक्ष को संजीवनी जैसा लग रहा है और बुधवार को इस मुद्दे पर संसद में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर हंगामा मचने के पूरे आसार हैं।