छात्राओं के आंदोलन ने बीएचयू के कुलपति प्रो. वीसी त्रिपाठी की पूरी छवि का मटियामेट कर दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उनसे सम्मान जनक तरीके से हाथ जोड़ लिया है। अब नवंबर 2017 में समाप्त हो रहे अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तक वह नाम मात्र के ही कुलपति रह गए हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि यह प्रो. जीसी त्रिपाठी के हाथ में है कि वह कुछ दिन के भीतर इस्तीफा दे देते हैं या फिर छुट्टी पर चले जाते हैं या फिर अाखिरी दिन तक अपने पद पर बने रहते हैं।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो कुछ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में घटित हुआ है और जिस तरीके से घटना को हैंडल किया गया है, उससे काफी चिंतित हैं। उन्हें छात्राओं पर लाठी चार्ज करने की घटना काफी खल रही है।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के सूत्र का कहना है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस मामले में फिलहाल दखल देने के मूड में नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी को उनके पद से हटाया जाएगा तो सूत्र का कहना है कि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संविधान के अनुसार इसकी एक जटिल प्रक्रिया है।
कई तरह की पेचीदगियां हैं। इसमें काफी लंबा समय लग जाएगा। सबसे पहला तो यह कि कुलपति को कारण बताओ नोटिस देना होगा। इसका वह जवाब देंगे। मामले की जांच के समिति का गठन करना पड़ेगा। इसमें उत्तर-प्रति उत्तर की स्थिति आएगी। फिर इसमें राष्ट्रपति की अनुमति लेनी पड़ेगी।
वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इन जटिलताओं से बचने के लिए मंत्रालय ने दो महीने के इंतजार का निर्णय लिया है। इन दोनों महीनों में कई छुट्टियां भी पड़ रही हैं।
इसलिए दो महीने तक का इंतजार कर लेना ही बेहतर उपाय समझ में आया। बताते हैं कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी लगातार इसको लेकर संवेदनशील हैं। वह प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
दशहरा के बाद नये कुलपति की प्रक्रिया
दशहरा की छुट्टी के बाद मंगलवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यालय के नये कुलपति की चयन प्रक्रिया की कार्यवाही शुरू कर देगा। इसके लिए चयन समिति का गठन समेत अन्य की शुरूआत हो जाएगी। माना जा रहा है कि नवंबर 2017 में प्रो. जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और उससे पहले नये कुलपति का चुनाव कर लिया जाएगा।