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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सोशल मीडिया की निगरानी से पीछे हटी केंद्र सरकार

Sat, 04 Aug 2018 01:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार सोशल मीडिया की निगरानी करने के अपने कदम से पीछे हट गई है। सरकार ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत को बताया कि उसने हर जिले में सोशल मीडिया कम्यूनिकेशन हब बनाने के प्रस्ताव संबंधी अपने विवादस्पद सर्कुलर को वापस लेने का फैसला किया है।

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अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बताया कि सरकार सोशल मीडिया हब नीति की फिर से गहन समीक्षा करेगी। इसके बाद पीठ ने सरकार के इस कदम को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया। सरकार के फैसले को तृणमूल कांग्रेस विधायक महुआ मोइत्रा ने चुनौती दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर निगरानी करना नागरिकों की व्यक्तिगत तौर पर सर्विलांस करना है, लिहाजा इसे रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया हब बनाने से व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया में मौजूद हर डाटा तक सरकार की पहुंच हो जाएगी। यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इसके जरिए सरकार हर व्यक्ति की निजी जानकारी खंगाल सकेगी। 
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पीठ ने पूछा था, क्या सर्विलांस स्टेट बनाना चाहती है सरकार 
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा था। साथ ही कोर्ट ने केंद्र की मंशा पर भी सवाल उठाए थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की थी कि लोगों के व्हाट्सएप मैसेज और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निगरानी रखकर क्या सरकार सर्विलांस स्टेट बनाना चाहती है। 

20 अगस्त को टेंडर खुलना था 
याचिका में कहा गया कि सरकार ने एक पीएसयू ब्रॉडकास्ट कंसलटेंट इंडिया लिमिटेड (बीसीआईएल) के जरिए टेंडर जारी किया। इसके जरिए एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदा मंगवाई गई। टेंडर 20 अगस्त को खुलना था। इस सॉफ्टवेयर के जरिए तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नजर रखने की बात थी। 

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किसी मोबाइल निर्माता से आधार नंबर सेव करने के लिए नहीं कहा : यूआईडीएआई

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उसने किसी भी मोबाइल फोन निर्माता या मोबाइल सेवा प्रदाता को अपना टोल फ्री नंबर मोबाइल फोन में दर्ज करने के लिए नहीं कहा है। यह जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश है।

यूआईडीएआई ने ट्विटर पर जारी बयान में स्पष्ट किया कि 18003001947 उसका ही पुराना टोल फ्री नंबर है, जो अब बंद हो चुका है। अब यूआईडीएआई का टोल फ्री नंबर 1947 है, जो पिछले दो साल से काम कर रहा है। प्राधिकरण ने यह स्पष्टीकरण शुक्रवार सुबह तब जारी किया, जब अचानक स्मार्टफोन उपयोग करने वाले हजारों लोगों की फोन बुक में खुद ही यूआईडीएआई के नाम से 11 अंक का नंबर दिखाई देने लगा। कुछ लोगों ने ट्विटर पर यूआईडीएआई से स्पष्टीकरण मांगने की कोशिश की और इसी दौरान कुछ लोगों ने इसे फोन हैक होने का नतीजा बता दिया। इसके बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आपको घबराने की जरूरत नहीं
यदि आपके फोन में भी यूआईडीएआई का टोल फ्री नंबर 18003001947 दिख रहा है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। ये हैकिंग के कारण नहीं बल्कि आपकी फोन बुक आपके गूगल अकाउंट से लिंक होने के कारण हो सकता है। यदि आपके आधार कार्ड में जीमेल पंजीकृत है तो इसके चलते आपके गूगल अकाउंट में यूआईडीएआई का पुराना टोल फ्री नंबर 18003001947 डिफॉल्ट के तौर पर सुरक्षित हो सकता है। इसे आप संपादित कर 1947 के तौर पर सही नंबर सुरक्षित कर सकते हैं।

सोशल मीडिया वेबसाइटों ने 700 यूआरएल किए हैं ब्लॉक : प्रसाद
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि सोशल मीडिया वेबसाइट जैसे फेसबुक और ट्विटर ने इस साल करीब 700 यूआरएल को ब्लॉक कर दिया है। ये यूआरएल सूचना तकनीक कानून के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस साल जून तक फेसबुक ने 499, यूट्यूब ने 57, ट्विटर ने 88, इंस्टाग्राम ने 25 और टम्बलर ने 28 यूआरएल ब्लॉक किए हैं। उन्होंने एक बार फिर सदन को आधार के तहत लिए जाने वाले बायोमैट्रिक्स पूरी तरह सुरक्षित होने के प्रति भी आश्वस्त किया। 
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