कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा और कांग्रेस तीन राज्यों में आने वाले विधानसभा चुनावों के साथ मिशन 2024 की तैयारियों में जुट गई हैं।
तेलंगाना और केरल में गठबंधन नहीं
कर्नाटक में जीत के बाद कांग्रेस के सुर में बदलाव आया है। पार्टी के नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि तेलंगाना और केरल में बीआरएस और वाम दलों के साथ गठबंधन संभव नहीं है। दूसरे राज्यों में गठबंधन के लिए मजबूत कोशिश जारी रहेगी।
पिछड़ने की वजह तलाशने क्षेत्रवार समीक्षा करेगी भाजपा
कर्नाटक में मिली करारी हार के कारणों की तलाश में भाजपा पार्टी के क्षेत्रवार प्रदर्शन की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। पार्टी बीते चुनाव की तरह ही इस चुनाव में लगभग समान मतप्रतिशत हासिल होने के बावजूद मिली हार के कारण भी तलाशेगी।
पिछली बार जहां भाजपा को 36.4% मतों के साथ 104 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं इस बार इस वोट प्रतिशत में मात्र 0.4% की कमी आने पर पार्टी ने 38 सीटें गंवा दीं। प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कटील के साथ बैठक के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने विपक्ष के प्रधानमंत्री मोदी की हार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि लचर प्रदर्शन के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। हिंदुत्व एजेंडे पर चुनाव लड़ने के आरोप को भी विपक्ष का दुष्प्रचार बताया।
बोम्बई का दावा...लोकसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव
बोम्मई ने दावा किया कि हार का लोकसभा चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि साल 2013 के चुनाव में पार्टी को विधानसभा की महज 40 सीटें मिली थी, जबकि लोकसभा में 19 सीटें मिलीं। इसी प्रकार 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को 28 में से 25 सीटें मिलीं।
एसटी आरक्षित सभी 15 सीटें हारी भाजपा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की सभी 15 सीटें भाजपा हार गई। वहीं अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की 36 में से 24 पर भी उसे हार का सामना करना पड़ा। 2018 में इन 51 में से 22 पर उसने जीत दर्ज की थी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री रहते हुए बसवराज बोम्मई ने राज्य में एससी-एसटी वर्गों के लिए आरक्षण बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन इसका कोई फर्क मतदान में नहीं पड़ा। एससी की 13 सीटों पर भाजपा दूसरे स्थान पर रही। राज्य की 224 में से 135 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने एससी आरक्षित 36 में से 21 और एसटी आरक्षित 15 में से 14 सीटें हासिल कीं। जेडीएस को एससी की 3 और एसटी की एक सीट पर जीत मिली।
9 मुस्लिम विधायक बने, सभी कांग्रेस से
कर्नाटक विधानसभा के लिए इस बार 9 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं और सभी कांग्रेस के हैं। पार्टी ने 13 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले राज्य में 15 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिए थे। कांग्रेस की कनीज फातिमा राज्य की इकलौती मुस्लिम महिला विधायक बनी हैं। वे पार्टी से टिकट पाने वाली इकलौती मुस्लिम महिला भी थीं। मुस्लिम विधायकों में से 2 ही वापस चुने गए हैं, बाकी 7 पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। कांग्रेस ने चुनाव पूर्व वादा किया था कि वह सत्ता में लौटी तो मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण देगी, जिसे भाजपा सरकार में रद्द किया गया था। हिजाब के विवाद और पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है।