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स्वतंत्रता दिवस 2018: कई सालों की रिसर्च और इन बदलावों के बाद देश को मिला था तिरंगा

Wed, 08 Aug 2018 11:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा... इन लाइनों को सुनते ही अपने देश और उसकी पहचान तिरंगे पर हमें गर्व होने लगता है। हमारे देश के तिरंगे में रंगे तीन रंग और उसके बीच में बना अशोक चक्र बहुत कुछ कहते हैं। लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि भारत ने आखिर इन्हीं तीन रंगों और अशोक चक्र को तिरंगे में जगह क्यों दी? आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। हमारे राष्ट्रीय ध्वज ने बहुत से पड़ावों को पार किया है और उसमें बहुत से बदलाव हुए हैं जिसके बाद आज देश के पास इतना अद्भुत तिरंगा है।
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बनने में लगे कई साल

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हमारा राष्ट्रीय ध्वज वर्तमान में जिस स्वरूप में दिख रहा है, उसे ऐसा बनने में कई सालों का समय लगा है। कई बदलावों के बाद देश को ये तिरंगा मिला।
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महात्मा गांधी को दिया गया था राष्ट्रीय ध्वज का सुझाव

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देश को ये तिरंगा देने के पीछे सबसे बड़ा हाथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पिंगली वेंकैया का है। उन्होंने ही इस बारे में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी को सुझाव दिया था। गांधी जी को ये विचार पसंद आया।

30 देशों के तिरंगों पर रिसर्च

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वेंकैया ने पांच सालों तक 30 देशों के तिरंगों पर रिसर्च की। फिर उन्होंने साल 1921 में दो रंगों वाले लाल और हरे रंग का तिरंगा पेश किया।
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ऐसे आया चक्र और सफेद रंग का सुझाव

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देश के तिरंगे में न तो सफेद रंग था और न ही अशोक चक्र। लेकिन जालंदर के रहने वाले हंसराज ने इसका सुझाव दिया। इसके बाद गांधी जी के कहने पर इसमें सफेद रंग जोड़ा गया।
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साल 1931 में फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज

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कराची के अखिल भारतीय सम्मेलन में केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ इस तिरंगे को फहराया गया। साल 1931 तक तिरंगे के बीच में अशोक चक्र एक चरखे की आकृति के साथ ही था लेकिन साल 1947 को जब स्वतंत्र हुआ था तो उसमें केवल अशोक चक्र ही रहा और चरखे की आकृति हटा दी गई।
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