राजा का कर्तव्य है प्रजा की रक्षा करना
हम कभी भी अपने पड़ोसियों का कोई अपमान, कोई हानि नहीं करते, लेकिन अगर हम इस तरह रहें और तब भी कोई बुराई पर ही उतर आए तो हमारे पास दूसरा इलाज क्या है? राजा का तो कर्तव्य है प्रजा की रक्षा करना है और राजा अपना कर्तव्य करेगा। गीता में अहिंसा का उपदेश है, लेकिन महाभारत में अर्जुन लड़े। उन्होंने लोगों को मारा क्योंकि उस समय उनके सामने ऐसे लोग थे कि उनका दूसरा इलाज नहीं था।
हिंदू धर्मग्रंथों में कहीं भी अस्पृश्यता का उपदेश नहीं
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हिंदू समाज को हिंदू धर्म को समझने की आवश्यकता है, जो दुनिया के सामने अपनी परंपराओं और संस्कृति को पेश करने का सबसे अच्छा तरीका होगा। हिंदू धर्मग्रंथों में कहीं भी अस्पृश्यता का उपदेश नहीं दिया गया है। कोई भी 'ऊंच' या 'नीच' (ऊंचा या नीच) नहीं है। उन्होंने कहा यह कभी नहीं कहा जाता कि एक काम बड़ा है और दूसरा छोटा... अगर आप ऊंच-नीच देखते हैं, तो यह अधर्म है। यह दयाहीन व्यवहार है। मोहन भागवत ने कहा कि कई धर्म हो सकते हैं और उनमें से प्रत्येक उनका पालन करने वालों के लिए महान हो सकता है। लेकिन, व्यक्ति को अपने द्वारा चुने गए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और दूसरों का सम्मान करना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा कि किसी को बदलने की कोशिश मत करो। धर्म के ऊपर एक धर्म है। जब तक हम इसे नहीं समझेंगे, हम धर्म को नहीं समझ पाएंगे। धर्म के ऊपर वह धर्म आध्यात्मिकता है।
वहीं, इस कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि उनकी पुस्तक 'द हिंदू मेनिफेस्टो' प्राचीन ज्ञान के सार को बताती है, जिसे समकालीन समय के लिए पुनर्व्याख्यायित किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंदू विचार हमेशा वर्तमान की जरूरतों को संबोधित करता रहा है, जबकि ऋषियों द्वारा शक्तिशाली सूत्रों में निहित कालातीत सिद्धांतों में दृढ़ता से निहित रहा है।
'हिंदू कभी ऐसा नहीं करते'
इससे पहले गुरुवार को बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि हिंदू कभी किसी से उसका धर्म पूछकर उसे नहीं मारते। यह लड़ाई धर्म और अधर्म के बीच की है। उन्होंने कहा कि रावण को भी पहले सुधरने का मौका दिया गया था, लेकिन जब उसने बदलाव से इनकार कर दिया, तब राम ने उसका अंत किया। इसके साथ ही भागवत ने आगे कहा कि हमारे दिल में दुख है, हम गुस्से में हैं। लेकिन इस बुराई को खत्म करने के लिए ताकत दिखानी होगी।
इसे भी पढ़ें- पाकिस्तान के आतंकियों को दे रहे थे मदद: घाटी में छिपे दुश्मन बेनकाब; 14 स्थानीय आतंकवादियों का पर्दाफाश
समाज पर एकता पर दिया जोर
साथ ही भागवत ने समाज में एकता पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर समाज एकजुट रहेगा, तो कोई भी दुश्मन हमें नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई हमें बुरी नीयत से देखेगा, तो उसकी आंख निकाल दी जाएगी। भागवत ने कहा था कि हिंसा हमारे स्वभाव में नहीं है, लेकिन चुपचाप सहना भी ठीक नहीं। एक सच्चे अहिंसक व्यक्ति को मजबूत भी होना चाहिए। ताकत हो और जरूरत पड़े, तो उसे दिखाना भी चाहिए।
इसे भी पढ़ें- Pahalgam: 'सेना की गतिविधियों का सीधा प्रसारण न करे मीडिया', पहलगाम हमले के बाद सरकार ने चैनलों को दिए निर्देश