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मिशन यूपी का आधार बनेगा असम का विजय मंत्र : महेन्द्र

Mon, 23 May 2016 03:20 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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महेंद्र सिंह
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असम में जीत में अहम भूमिका निभाने वाले भाजपा राष्ट्रीय महासचिव महेन्द्र सिंह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। भाजपा युवा मोर्चा से लेकर उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्य के रूप में उन्होंने अपनी जुझारू छवि के बूते लोकप्रियता हासिल की। पार्टी के कई अहम जिम्मेदारियों को निभाने के बाद लगभग दो साल से असम में प्रभारी के रूप में काम कर रहे हैं। असम की जीत के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक में शिरकत करने दिल्ली आए महेन्द्र सिंह से राघवेंद्र नारायण मिश्र ने बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश -
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आप उत्तर प्रदेश से हैं, असम की जीत का उत्तर प्रदेश में क्या फायदा मिलेगा?
यह तय है कि भाजपा के मिशन उत्तर प्रदेश 2017 का मुख्य आधार असम का विजय मंत्र बनने वाला है। असम और उत्तर प्रदेश के हालात एक जैसे हैं। उत्तर प्रदेश में भी असम की तरह  जंगलराज, भ्रष्टाचार के साथ ही कानून व्यवस्था चरमरा गई है। लोगों में भय और खौफ है। तुष्टीकरण की राजनीति से लोगों में सपा सरकार के खिलाफ गुस्सा है। मायावती को लोग पहले ही आजमा चुके हैं। प्रदेश की जनता मानती है कि सपा और बसपा में कोई मौलिक अंतर नहीं है। कांग्रेस मरी हुई है। ऐसे में भाजपा ही एकमात्र आशा बनकर उभरी है।

असम की जमीन भाजपा के लिए अनुकूल नहीं थी। सख्त जमीन पर कमल खिलाने में कितनी मशक्कत करनी पड़ी?
यह सच है कि भाजपा के लिए असम में चुनौतियां अधिक थी। इस चुनौती पूर्ण कार्य में संगठन के तमाम कार्यकर्ताओं के अंदर आत्मविश्वास को जगाना था। एक बार कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास जग जाता है तो सियासी जंग जीतनी आसान हो जाती है। आरएसएस के स्वयं सेवकों ने लंबे समय से काम कर असम को राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। 
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उत्तर प्रदेश से असम जाकर आपने शुरुआत कहां से की?
असम का प्रभारी बनाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुझे अहम जिम्मेदारी दी। उन्होंने असम में जीत का खाका पहले ही खींच लिया था। मुझे उसे अमल में लाना था। हमने सबसे पहले संगठन के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया। हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर राम माधव और पार्टी के सभी वरिष्ठ जनों का मार्गदर्शन मिला। 

संगठन विस्तार की शुरुआत कैसे हुई?
सदस्यता अभियान से शुरुआत हुई जिसमें 28 लाख सदस्य बनाए गए। महासंपर्क अभियान में असम के एक-एक घर जाकर संपर्क का प्रयास किया गया। लोगों में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ता गया और उन्होंने भाजपा को सशक्त विकल्प के रूप में स्वीकार किया। पार्टी को पहली सफलता स्थानीय निकायों में मिली है। यह सेमीफाइनल मानकर लड़ा गया था। 

असम की जीत का मुख्य आधार किसे मानते हैं?
हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के जनहित के कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में जनता को बताया। प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। सर्वानंद सोनोवाल जैसा ईमानदार चेहरा असम की जनता के सामने था। इससे यह विश्वास पुख्ता हुआ कि असम और केंद्र में भाजपा की सरकार होने से विकास की गति तेज हो सकेगी। 

जीत के लिए कौन-कौन सी सियासी कसरत की?
सबसे बड़ा टास्क जनजातियों का विश्वास हासिल करना था। उसमें मोदी के विकास के मंत्र का फायदा मिला। माहौल बना तो दूसरे दलों को भी भाजपा की जीत का भरोसा होने लगा। इससे कांग्रेस टूटी। एजीपी के लोग हमारे साथ आए और सियासी जमीन मजबूत होती चली गई।

भाजपा की जीत में कांग्रेस का कितना योगदान है?
कांग्रेस का कुशासन बड़ा कारण है। असम में 15 साल से विकास ठप था। भ्रष्टाचार चरम पर था। हत्याएं हो रही थीं। लोग कांग्रेस सरकार से ऊब गए थे। भाजपा ने सड़क पर उतरकर इसका विरोध किया और हमने सिर्फ हल्ला बोल ही नहीं किया बल्कि बेहतर प्रशासन का विश्वास भी दिलाया। 
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