के बाद भी सरकार ने नई जिम्मेदारियां दी हैं। इन जजों को मानवाधिकार आयोग के पद से लेकर राज्यपाल तक के पद दिए गए हैं। इसकी शुरुआत जस्टिस जीटी नानावटी से हुई थी। जिन्हें साल 2000 में सेवानिवृत्ति के बाद दो आयोगों का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद इस कड़ी में स्वतंत्र कुमार तक का नाम शामिल हैं। आज हम आपको बताते हैं उन सभी जजों के बारे में जिन्हें रिटायर होने के बाद सरकार ने नई
जस्टिस जीटी नानावटी: साल 2000 में रिटायर हुए थे। इन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद दो आयोगों का पदभार संभाला। 2002 में गुजरात दंगों के जांच आयोग की अध्यक्षता भी की।
जस्टिस पीवी रेड्डी: 2005 को सेवानिवृत्त हुए थे। बाद में लॉ कमीशन के चेयरमैन बने थे।
जस्टिस एके माथुर: 7 अगस्त 2008 को सेवानिवृत्त हुए थे। बाद में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के चेयरमैन का पद ग्रहण किया था।
जस्टिस अरिजित पसायत: 10 मई 2009 को सेवानिवृत्त हुए। फिर कंपीटिशन एपेलेट ट्रिब्यूनल के चेयरमैन का पद ग्रहण किया था।
जस्टिस पीपी नाओलेकर: 2009 को सेवानिवृत्त हुए। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त बने।
जस्टिस एसबी सिन्हा: 2009 को सेवानिवृत्त हुए। बाद में टेलीकॉम डिस्प्यूट एंड सेटलमेंट एपेलेट ट्रिब्यूनल के चेयरमैन रहे।
जस्टिस तरुण चटर्जी: 2010 में सेवानिवृत्त हुए। अरुणाचल के सीमा विवाद को निपटाने के लिए कमिश्नर का पद ग्रहण किया था।
जस्टिस केजी बालाकृष्णन: 2010 में रिटायर हुए। बाद में मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन का पद संभाला।
जस्टिस एचएस बेदी: 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद पुलिस एनकाउंटर में होने वाली मौतों की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख का पदभार संभाला।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू: 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे। बाद में प्रेस काउंसिल के चेयरमैन रहे।
जस्टिस आरवी रविंद्रन: 2011 को सेवानिवृत्त हुए। बाद में एनजीटी के चेयरमैन बने।
जस्टिस पी सताशिवम: 2014 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद केरल के राज्यपाल बनाए गए।
जस्टिस बीएस चौहान: 2014 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद लॉ कमीशन के चेयरमैन बने।
जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय: 2015 में सेवानिवृत्त। लॉ ट्रिब्यूनल के चेयरमैन बने।
जस्टिस एचएल दत्तू: 2015 को सेवानिवृत्त हुए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार: सेवानिवृत्त के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन बने।