तीसरा शाही स्नान स्थगित हो
उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बहुत तेजी से फैल रही है। इसे देखते हुए हम सभी प्रमुख अखाड़ों के संतों से जाकर निवेदन कर रहे हैं कि कुंभ के दो शाही स्नान हो गए हैं तीसरे शाही स्नान को स्थगित कर दिया जाए या सांकेतिक कर दें। अधिकांश संतों ने अगले शाही स्नान को सांकेतिक करने की बात का भरोसा भी दिया है। कुल 13 में से दो अखाड़ों ने खुद ही कुंभ समाप्ति का एलान भी कर दिया है। बाकि 11 अखाड़ों के लगातार हम संपर्क में हैं। हम सभी से आग्रह कर रहे हैं कि कोविड की स्थिति को देखते हुए आप खुद ही समाप्ति की घोषणा कर दें ताकि भीड़ कम से कम आए।
विश्व हिंदू परिषद् के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अमर उजाला से कहा, प्रधानमंत्री की अपील पर संतों को निर्णय लेना है कि आगे कुंभ की क्या रूपरेखा होगी। कुंभ हमारी परंपरा है और संत समाज भी अपनी चिंता व्यक्त कर रहा है। पीएम के आह्वान पर संत समाज विचार कर जल्द ही कोई निर्णय करेगा।
विश्व हिंदू परिषद् के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने पर अमर उजाला से कहा, कुंभ एक पूरा कार्यकाल होता है वह किसी के कहने से न तो घटता है न ही बढ़ता है। हम लोगों से अपील कर रहे हैं वे सावधानी से आएं और जाएं। अभी अखाड़ों से भी चर्चा कर रहे हैं आगे कुंभ की क्या रूपरेखा होनी चाहिए। हालांकि कुछ अखाड़े चाहते हैं कि कुंभ जारी रहे और कुछ चाहते है कि समाप्ति का एलान कर देना चाहिए।
कई अखाड़े अड़े
निरंजनी और आनंद अखाड़ों द्वारा कुंभ समापन की घोषणा करने के बाद कुछ अखाड़े इसके विरोध में उतर आए हैं। निर्वाणी अखाड़े ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि कुंभ मेले की समाप्ति की घोषणा का अधिकार मेलाधिकारी और प्रदेश के मुख्यमंत्री का है। निरंजनी अखाड़े ने बिना किसी सहमति से ऐसा कहकर समाज में अफरा-तफरी मचाने का अपराध किया है। निरंजनी अखाड़े को अपने ऐसे बयान पर पूरे अखाड़ा परिषद् से माफी मांगनी चाहिए। ये निर्णय सभी 13 अखाड़े मिलकर लेते हैं।
वहीं हरिद्धार में कोरोना किस वजह से फैल रहा है इसे लेकर अखाड़े आपस में ही भिड़ गए हैं। बैरागी अखाड़े ने कोरोना संक्रमण के लिए अपने बयान में संन्यासी अखाड़े को जिम्मेदार बताया है। वहीं निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास ने कुंभ में बढ़ते संक्रमण के मामलों के लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रधानमंत्री के बाद स्वामी अवधेशानंद ने भी की अपील
प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने भी ट्वीट कर कहा, 'पीएम के आह्वान का हम सम्मान करते हैं! जीवन की रक्षा महत पुण्य है। मेरा धर्म परायण जनता से आग्रह है कि कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए भारी संख्या में स्नान के लिए न आएं एवं नियमों का निर्वहन करें।'
इधर, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए निरंजनी अखाड़े ने 15 दिन पहले ही कुंभ मेला खत्म करने का एलान कर दिया था। इस अखाड़े के 17 साधु-संत संक्रमित हो चुके हैं। अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी खुद संक्रमित हैं। अब तक कुंभ मेले में शामिल होने वाले करीब 70 से ज्यादा साधु-संत कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। दो दिन पहले ही अखिल भारतीय श्री पंचनिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देवदास की मौत भी हो चुकी है।
गौरतलब है हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान आयोजित दो शाही स्नान कार्यक्रमों में क्रमशः 31 लाख और 14 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे। इस सप्ताह की शुरुआत में हरिद्वार में लगातार दो दिनों में 1000 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मामलों के सामने आने के बाद देशभर से कुंभ जैसे आयोजनों को स्थगित करने की मांग उठने लगी है। हरिद्वार में कुंभ मेले का समय 30 अप्रैल तक है। कोरोना के चलते इस साल कुंभ का मेला जनवरी की बजाय एक अप्रैल से शुरू किया गया था।