राम विलास पासवान के बाद अब केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति ए. के. गोयल को पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए. के. गोयल को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) का अध्यक्ष बनाने पर एनडीए के घटक दलों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। ऐसे में मोदी सरकार की मुश्किलें आगामी चुनावों को लेकर भी बढ़ सकती हैं। इसकी वजह है कि कांग्रेस ने इशारा किया है कि दलित मुद्दे पर एनडीए के ही घटक दल यूपीए के पाले में आ सकते हैं।
रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के वरिष्ठ नेता और सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि जस्टिस गोयल ने एससी-एसटी अत्याचार निरोधक कानून पर गलत फैसला दिया था। मैं नहीं समझता कि उन्हें एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए था। मैं एनडीए का हिस्सा हूं, लेकिन मैं उन्हें पद से हटाने की मांग करता हूं। उन्होंने दलितों की भावनाओं को आहत किया है। अठावले ने कहा कि विभिन्न दलित सांसदों ने पहले से ही नियुक्ति का विरोध किया है। महाराष्ट्र के दलित नेता ने कहा कि वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे।
एलजेपी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने पिछले हफ्ते एनडीए के एससी, एसटी सांसदों के लिए एक रात्रि भोज का आयोजन किया था, जहां रामदास अठावले भी मौजूद थे, रात्रि भोज में गोयल की नियुक्ति के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। पासवान ने तब कहा था कि एनडीए के कई दलित सांसदों ने पूर्व न्यायमूर्ति गोयल की नियुक्ति के द्वारा भेजे गए गलत संदेश पर चिंता व्यक्त की। पासवान ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है कि दलित अधिकार गठबंधन अखिल भारतीय अम्बेडकर महासाभा (एआईएएम) ने पूर्व न्यायमूर्ति गोयल को पद से हटाने की मांग की है।
आपको बता दें कि शुक्रवार को रामविलास पासवान के बेटे लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने कहा था कि पार्टी के अंदर लोगों का संयम टूट रहा है, क्योंकि दलितों एवं आदिवासियों को लेकर चिंताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा था कि 2014 में भाजपा और लोजपा के बीच गठजोड़ के मूल में इन समुदायों के हितों की रक्षा करने का विषय था। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग पिछले 4 महीने से कर रही है, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। चिराग पासवान ने प्रधान मंत्री को एक अलग पत्र में इन मांगों को दोहराया है। 2 अप्रैल के एपिसोड (जब दलितों ने राष्ट्रव्यापी विरोध कहा था) को दोहराने से रोकने के लिए, सरकार को तुरंत एनजीटी अध्यक्ष के पद से पूर्व न्यायमूर्ति ए. के. गोयल को हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनजीटी पद पर जस्टिस गोयल की नियुक्ति ने एससी और एसटी को एक संदेश भेजा था कि उन्हें "पुरस्कृत" किया जा रहा है।
गौरतलब है कि एनजीटी के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति ए.के. गोयल सुप्रीम कोर्ट के उन 2 जजों में शामिल थे, जिन्होंने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के संबंध में कुछ बदलाव किए थे। कोर्ट ने आदेश दिया था, 'इस एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए। इस एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत मिले। पुलिस को सात दिन में जांच करनी चाहिए। सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।' ए.के. गोयल जुलाई में रिटायर हुए हैं और केंद्र सरकार ने उन्हें पांच साल के लिए एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
बता दें कि कानून को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग को लेकर कई अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति संगठनों एवं आदिवासी समूहों ने आगामी 9 अगस्त को विरोध-प्रदर्शन कर भारत बंद बुलाने का ऐलान किया है। एलजेपी की दलित सेना ने घोषणा की है कि वह आंदोलन में भाग लेगी।