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नोटबंदी के बाद कर वसूली कानून को चुनौती देने वाली याचिका खारिज 

Thu, 22 Dec 2016 04:26 AM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली 
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नोटबंदी के बाद बैंक में जमा किए गए अघोषित रकम से कर वसूली संबंधी सरकार के नियम में फेरबदल करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह अदालत का काम नहीं है कि वह सरकार को बताए कि सरकार बेहतर नीति बना सकती थी।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि नीतियों को बनाने में अदालत दखलअंदाजी नहीं कर सकती और न ही यह कह सकती कि सरकार को यह नीति बनानी चाहिए जो बेहतर हो सकती थी। अदालत ने यह टिप्पणी सिद्धार्थ मेहता द्वारा दाखिल उस जनहित याचिका को खारिज करते हुए की है। याचिका में करनिर्धारण नीति (दूसरे संशोधन) विधेयक, 2016 केविभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। 

इस योजना केतहत नोटबंदी केबाद बैंकों या डाकघरों में जमा किए गए अघोषित आय पर भारी कर लगाने का प्रावधान है बल्कि कुछ हिस्सा कर के तौर पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 2016 को देना अनिवार्य है। गत 15 दिसंबर को विधेयक को हरी झंडी मिलने केबाद यह कानून की शक्ल ले चुका है। 
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'नोटबंदी के फैसले में कई खामियां हैं'

- फोटो : demo pic
याचिका में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जमा होने वाली रकम और चार वर्ष के लॉक-इन-पीरियड के प्रावधान को गैरकानूनी और शून्य करार देने की गुहार की गई थी। साथ ही अघोषित आय पर भारी कर लगाने के प्रावधान को भी निरस्त करने की गुहार की गई थी।

याचिका में यह भी कहा गया था कि सरकार को यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह इस योजना के तहत हासिल किए गए आयकर में से आधी रकम ईमानदार करदाताओं के खाते में जमा कराए। याचिकाकर्ता का कहना था कि नोटबंदी के फैसले में कई खामियां हैं। यही कारण है कि लोगों के पास काले धन को सफेद बनाने के अब भी कई रास्ते हैं। 
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