कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर लगातार पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं। पहले राहुल गांधी और सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली बैठक से थरूर नदारद रहे। इसके बाद रविवार (14 दिसंबर) को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित पार्टी की विशाल रैली में शशि थरूर कहीं नजर आए।
मंच पर नही थे थरूर, क्या सब कुछ ठीक!
कांग्रेस ने एसआईआर और 'वोट चोरी' के मुद्दे के खिलाफ एकजुट होकर रैली की, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के साथ अधिकतर नेता मंच पर एक साथ नजर आए, लेकिन शशि थरूर उस मंच से गायब थे। इसके बाद एक बार फिर राजनीतिक हलको में थरूर को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई। हालांकि अब इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद की सफाई सामने आई है।
'मेरी तरफ से सब ठीक', बोले थरूर
रविवार को रामलीला मैदान में 'वोट चोरी' के खिलाफ पार्टी की रैली में शामिल ना होने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मैं कल विदेश में था। यह एक प्रतिबद्धता थी, जो मैंने छह महीने पहले किया था।" इसी के साथ उन्होंने साफ कहा कि मेरी तरफ से सब ठीक है।
वहीं केरल में हालिया संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव पर शशि थरूर ने कहा, "वे (बीजेपी) तिरुवनंतपुरम में जीत गए हैं। लेकिन बाकी सभी जगहों पर यूडीएफ और कांग्रेस पार्टी गठबंधन को बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं।"
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मनरेगा के नाम बदलने पर बोले थरूर
वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने MGNREGA का नाम बदले जाने पर कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि महात्मा गांधी का ग्रामीण गरीबों के बारे में बहुत साफ विजन था, जिनकी वे परवाह करते थे। उन्होंने सबसे गरीब इंसान की आंखों से आंसू पोंछने की बात की थी। पिछले 20 साल से हर कोई इस स्कीम को अलग-अलग भारतीय भाषाओं में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जानता है। अब इसे क्यों बदलना है? आप योजना की शर्तें बदल सकते हैं। यह सरकार का अधिकार है, लेकिन नाम बदलना गैर-जरूरी है।"
योजना का नाम बदलने पर थरूर का पोस्ट
शशि थरूर ने इससे पहले एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "सरकार के प्रस्तावित नए 'जी राम जी' बिल में मनरेगा का नाम बदलने पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्राम स्वराज की अवधारणा और राम राज्य का आदर्श कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं थे; वे गांधीजी की सोच के दो स्तंभ थे। ग्रामीण गरीबों के लिए एक योजना में महात्मा का नाम हटाना इस गहरे जुड़ाव को नजरअंदाज करता है। उनकी आखिरी सांस 'राम' के नाम पर थी; आइए, हम ऐसी जगह बंटवारा करके उनकी विरासत का अपमान न करें, जहां कोई बंटवारा था ही नहीं।"
वहीं जब शशि थरूर के पोस्ट पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता विवाद की निंदा कर रहे हैं या नाम बदलने की। इस पर थरूर ने जवाब देते हुए कहा कि यह बिल्कुल साफ है कि मैं महात्मा के नाम को बदलने का विरोध कर रहा हूं। मेरा ट्वीट पढ़ें
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