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Politics: गांवों में डिजिटल क्रांति लाने की मांग; अखिल भारतीय पंचायत परिषद प्रधानमंत्री मोदी को सौंपेगा ज्ञापन

Mon, 15 Dec 2025 07:34 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

परिषद ने कहा है कि गांधी जी का 'ग्राम स्वराज' आज भी देश की सबसे बड़ी आवश्यकता है, लेकिन अब यह नए अवतार में होना चाहिए जिससे समय के बदलाव के साथ आई तकनीक के साथ तालमेल बिठाते हुए किसानों और आम लोगों को इससे जोड़ा जा सके। आज का ग्राम स्वराज केवल खादी तक सीमित नहीं है, यह 'डिजिटल स्वराज' भी है। 
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अखिल भारतीय पंचायत परिषद पीएम मोदी को सौंपेगा ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय पंचायत परिषद देश के गांवों को डिजिटल क्रांति से जोड़ने के लिए शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करेगा। पीएम मोदी से मुलाकात कर देश के विकास में शहरों की बजाय गांवों को आधार बनाने सहित 18 मांगें की जाएंगी। परिषद का मानना है कि स्मार्ट सिटी की सोच ने देश का विकास शहरों तक सीमित कर दिया है, जबकि समग्र विकास देश के गांवों को विकसित करने के बिना नहीं हो सकता।     
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'गांवों से होकर निकला देश के विकास का रास्ता'
पूर्व केंद्रीय मंत्री और अखिल भारतीय पंचायत परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश के तमाम नेताओं ने देश के विकास का रास्ता गांवों से होकर ही निकाला था। यह प्राथमिकता राजीव गांधी के दौर में भी दिखाई पड़ी थी, लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दौर में गांवों को केवल एक बाजार बनाकर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब यह स्थिति बदलनी चाहिए।      

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गांवों को विकसित करने का रोडमैप पीएम से करेंगे साझा
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे की पहल पर कर्नाटक में आयोजित अखिल भारतीय पंचायत परिषद की बैठक में देश के सभी राज्यों से आए प्रस्तावों को शामिल करते हुए पीएम से 18 सूत्रीय मांगों का विशेष ज्ञापन तैयार किया गया है। सुबोध कांत सहाय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पीएम से मुलाकात कर गांवों को विकसित करने का एक रोड मैप उनसे साझा करेगा।
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'आज स्थानीयकरण और आत्मनिर्भरता का दौर'
सुबोध कांत सहाय ने कहा कि वैश्वीकरण का दौर पुराना हो चुका है। आज 'स्थानीयकरण' और 'आत्मनिर्भरता' का दौर है। वैश्विक बाजार ने हमारे गांवों को केवल एक 'बाजार' बनाकर छोड़ दिया है। इससे स्थानीय संसाधनों जल, जंगल और जमीन पर दबाव बढ़ा है। इसका समाधान दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई  या मुंबई में नहीं, बल्कि हमारी ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही हो सकता है।
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