शरीफ ने रावलपिंडी की अदालत में
मुंबई हमले की लंबी सुनवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस ट्रायल को हम अंजाम तक क्यों नहीं पहुंचाते। कोई उन्हें बताए कि इसकी वजह क्या है। बता दें इस मामले पर 7 आरोपियों के खिलाफ पाकिस्तान के कई सरकारी और गैर-सरकारी गवाहों द्वारा सबूत दिए जाने के बावजूद भी कोई प्रगति नहीं हो रही है। पाकिस्तान इसमें फैसला लेने के लिए भारतीय गवाहों को अपने यहां बुलाने पर अड़ा हुआ है।
शरीफ ने कहा था कि आतंकियों को सीमा पार जाकर आतंकी हमलों को अंजाम देने की इजाजत देना कतई मंजूर नहीं किया जा सकता है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी यह कह चुके हैं। इस साक्षात्कार में मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों की मौजूदगी के कारण वह पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ चुका है।
उन्होंने साक्षात्कार में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में तमाम कुर्बानियां देने के बावजूद भी कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है, जबकि अफगानिस्तान की बात सभी मान रहे हैं। हमें इस मामले में अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।