उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा सीनियर बेसिक स्कूलों में साइंस गणित या गणित विषय के साथ टीईटी पास होना इसकी अर्हता है। याचिका में कहा गया है कि वही लोग टीईटी परीक्षा में बैठ सकते थे, जो सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की योग्यता रखते हों। लेकिन प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण ले रहे लोगों ने परीक्षा दी और सफल होने पर उन्हें नियुक्ति भी मिल गई।
कोर्ट ने कहा कि नियमावली 1981 के तहत टीईटी में प्रशिक्षण के अंतिम वर्ष के छात्र या प्रशिक्षित हो चुके छात्र ही बैठ सकते हैं। ये दोनों प्रश्न तथ्यात्मक हैं। इसलिए पहले इस संबंध में बीएसए निर्णय लें। याचिका में कहा गया है कि जिन्होंने
स्नातक में साइंस या गणित विषय नहीं लिया है और जो प्रशिक्षित नहीं हैं या प्रशिक्षण के अंतिम वर्ष में नहीं हैं, उन्हें नियुक्ति दे दी गई।
याचिकाओं में बीएसए पर बिना योग्यता व अर्हता के लोगों की नियुक्ति देने का आरोप लगाते हुए चुनौती दी गई थी। शासनादेश 2013 के विपरीत मनमानी नियुक्तियों को रद्द किए जाने की मांग की गई है। कोर्ट ने याचिकाओं का निस्तारण कर शिकायतों को दूर करने का निर्देश बीएसए को दिया है। बता दें याचिका पर अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय ने पक्ष रखा था।