सैन्य अदालत के फैसले के बाद वायुसेना ने महिला अधिकारी को नौकरी से निकालने का फैसला वापस ले लिया है। दरअसल, महिला अधिकारी ने प्री मैच्योर बच्चे को जन्म दिया था। इसी बीच वायुसेना ने उसे नौकरी से निकालने का फैसला कर लिया था।
भारतीय वायु सेना की एक महिला अधिकारी को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। वायुसेना ने मैटरनिटी लीव पर चल रही महिला को जबरन नौकरी से निकालने का आदेश जारी किया था। वायुसेना मुख्यालय ने 10 दिसंबर 2021 को मैटरनिटी लीव पर चल रही महिला अधिकारी को 23 दिसंबर को उसे सर्विस से हटाने का आदेश जारी कर दिया
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सैन्य अदालत के फैसले के बाद वायुसेना ने अपना फैसला वापस ले लिया।
दरअसल, महिला अधिकारी ने प्री मैच्योर बच्चे को जन्म दिया था। वायुसेना की ओर से उसे मैटरनिटी लीव की अनुमति मिली थी, लेकिन मातृत्व अवकाश पूरे होने से पहले ही विभाग की ओर से उसे जबरन नौकरी से निकाला जा रहा था। महिला अधिकारी के पास इस बाबत नोटिस भी गया। इसके बाद महिला अधिकारी ने सैन्य कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के दखल के बाद वायुसेना ने अपना फैसला वापस ले लिया।
11 मार्च तक थी छुट्टी की मंजूरी
महिला अधिकारी के काउंसल कर्नल (रिटायर्ड) आईएस सिंह ने कहा कि यह मामला स्क्वॉड्रन लीडर अंजू गहलोत से जुड़ा है, जो भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में शॉर्ट सर्विस कमिशन्ड अफसर हैं। महिला अधिकारी ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच से गुहार लगाई थी। क्योंकि 23 दिसंबर 2021 को उसे मेडिकल ग्राउंड्स का हवाला देकर समय से पहले ही सर्विस से निकाला जा रहा था जबकि अगले साल 11 मार्च तक उसकी मैटरनिटी लीव मंजूर है। महिला अफसर ने वायुसेना से गुहार लगाई थी कि उसकी मैटरनिटी लीव खत्म होने तक उसे नौकरी से ना निकाला जाए, लेकिन इस गुहार को भी खारिज कर दिया गया, जिसके बाद महिला सैन्य अदालत में पहुंच गई।